Chaibasa News : लोकगीतों से जीवंत हुई संस्कृति प्रकृति को बचाने का दिया संदेश
दुइकासाई में धूमधाम से मना मागे परब
चक्रधरपुर. चक्रधरपुर की इटिहासा पंचायत के दुइकासाई गांव में बुधवार को आदिवासी समुदाय ने मागे परब पूरे पारंपरिक उल्लास, श्रद्धा और सामाजिक एकता के साथ मनाया. पर्व के दूसरा दिन जात्रा के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ. गांव के तीनों टोलों के अलावा आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं-पुरुष शामिल हुए. सुबह से उत्सव का माहौल छाया रहा, जो शाम ढलते ही जनसैलाब में बदल गया. यह पर्व आदिवासी समाज के लिए धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है. यह प्रकृति, देवताओं और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है. जात्रा के दिन ग्रामीणों ने दैनिक कार्य छोड़कर पूरे मनोयोग से भाग लिया. दियुरी की भूमिका में सुखलाल केराई और संजू केराई ने शाम 5 बजे पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना संपन्न कराई. पहले पारंपरिक सामग्री अर्पित की गयी, फिर गांव की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और शांति की कामना की गयी. पूजा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए.
मांदर व ढोल की थाप पर झूमा गांव
मांदर-ढोल की थाप पर गांव झूम उठा. संजीव केराई, पिरो केराई और नर्सिंग केराई ने वाद्ययंत्र बजाया. सुमी केराई, पालो केराई और तेलो केराई के नेतृत्व में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक नृत्य किया. महिला-पुरुष सज-धजकर नाचते-गाते मंडप पहुंचे, गलियों में उत्सव का नजारा दिखा. हर उम्र के लोग मेले में उत्साहित नजर आए. पारंपरिक गीतों से पूर्वजों की स्मृति, प्रकृति का महत्व और एकता का संदेश दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि यह पर्व नयी ऊर्जा, भाईचारा और सांस्कृतिक की पहचान मजबूत करता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
