Chaibasa News : नक्सली किला ढहने के साथ पहुंचने लगा विकास

कोल्हान. एक साल में दो बड़े स्तंभों का हुआ खात्मा

मनोहरपुर/गोइलकेरा . सारंडा और कोल्हान के घने जंगल एक-दूसरे से सटे व घने होने के कारण नक्सलियों के लिए हमेशा से एक सुरक्षित गलियारा (कॉरिडोर) रहे हैं. कुमडीह, तितलीघाट और होजरदोरी से लेकर सांगाजाटा और बेरोई तक के पहाड़ी रास्ते नक्सलियों की आवाजाही को आसान बनाते थे. इसी का फायदा उठाकर नक्सली दस्ता पिछले दिनों कोल्हान में सक्रिय हुआ था. पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की हत्या कर दी थी. सूत्रों के अनुसार, मारा गया नक्सली अमृत (इस्माइल) भी इस हत्या में शामिल था.

2025 से शुरू हुई कहानी

नक्सलियों के लिए अभेद्य माने जाने वाले इस क्षेत्र की नींव साल 2025 में हिलनी शुरू हुई. महज एक साल के भीतर संगठन ने अपने दो बड़े स्तंभ खो दिये. 10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य अमित हांसदा उर्फ अपटन को 7 अगस्त, 2025 को ढेर किया गया. वहीं, 2 लाख का इनामी एरिया कमांडर अरुण कारकी उर्फ वरुण को 13 अगस्त, 2025 को मुठभेड़ में मारा गिराया गया. इन बड़े नेताओं के खात्मे ने संगठन के नेटवर्क और हौसले को पूरी तरह तोड़ दिया है.

आतंक की जगह अब विकास की यात्रा:

जिस कोल्हान की धरती पर कभी लाल आतंक का साया था, वहां अब अरबों रुपये की विकास योजनायें धरातल पर उतर रही हैं. अब बोरोई, सांगाजटा, रेला और पराल जैसे सुदूर गांवों में सरकारी योजनाएं पहुंच रही हैं. पहले जहां सूर्यास्त के बाद सन्नाटा पसर जाता था, वहां अब ग्रामीण देर रात तक बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं.

अभियान में तकनीक के इस्तेमाल से मिली सफलता

नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सायतवा, बोरोई, सांगाजटा और आरहासा में नये पुलिस कैंप स्थापित किये गये हैं. सुरक्षाबल अब केवल जमीनी जंग नहीं लड़ रहे, बल्कि ड्रोन कैमरों और आधुनिक तकनीक से बीहड़ों की निगरानी की जा रही है. हाल ही में सुरक्षाबलों ने 21 किलोमीटर के दायरे में 53 नक्सलियों की घेराबंदी की थी, जो प्रशासन की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. मजबूत प्रशासन और पुलिस की सक्रियता ने नक्सलियों को उनके सबसे सुरक्षित पनाहगार में ही घेर कर रख दिया है.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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