Chaibasa News : हाटगम्हरिया में शाम 5:20 में दिखा हाथी, तीन घंटे में करीब 7 किमी चला

पश्चिमी सिंहभूम : सात दिनों से यमराज बनकर घूम रहा हाथी, कुमारडुंगी के रत्नासाई, जगन्नाथपुर व नोवामुंडी में तलाश जारी

जगन्नाथपुर. पश्चिम सिंहभूम जिले के डुमरिया व आसपास में एक जंगली हाथी के आने से ग्रामीणों में दहशत है. हाथी लगातार अपना लोकेशन बदल रहा है, जिससे लोग रात भर जागने को विवश हैं. हाथी शाम ढलते ही सक्रिय हो गया है. तेजी से आबादी वाले क्षेत्रों में घूम रहा है. मात्र 3 घंटे के भीतर हाथी ने लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है. गुरुवार शाम करीब 5:20 बजे डुमरिया निवासी राजकुमार कुम्हार हाटगम्हरिया से घर लौट रहे थे. तिरिंगबुरु जंगल के पास मोड़ पर उनके सामने अचानक विशालकाय हाथी आ गया. राजकुमार दूसरे रास्ते से भागकर अपने गांव पहुंचे. तुरंत ग्रामीणों को इसकी सूचना दी. गांव में हड़कंप मच गया. राजकुमार के दोस्त डूरसु पिंगुआ ने तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को बताया. ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद घंटों तक कोई अधिकारी या वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा.

ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा

वन विभाग की सहायता न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है. युवा और बुजुर्ग हाथों में मशाल (टॉर्च और आग) लेकर हाथी को खदेड़ने और अपने जान-माल की रक्षा करने में जुटे हैं.

हिंसक हाथी का मार्ग

शाम 7:00 बजे

लंडुसाई टोला में हरीश बोदरा के घर के बाहर हाथी बैठ गया.

रात 8:00 बजे

ग्रामीणों के शोर मचाने पर हाथी बाइबुरु और जोजोसाई के खेतों की ओर बढ़ा.

रात 8:40 बजे

हाथी सापरुमसाई पहुंच गया.

सातवें दिन शांति : हाथी से जान-माल को क्षति नहीं, डर कायम

चाईबासा/जगन्नाथपुर.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में बीते छह दिनों से यमराज बनकर घूम रहा अकेला हाथी सातवें दिन (बुधवार रात व गुरुवार को दिनभर) शांत रहा. बुधवार रात को किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. इससे वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली है. हालांकि, विभाग की टीम लगातार हाथी को ट्रेस करने में जुटी है. विभाग की करीब 90 सदस्यीय टीम हाथी की तलाश में जंगल का खाक छान रही है. चाईबासा वन क्षेत्र के रेंजर जेपी सिंह की टीम कुमारडुंगी के रत्नासाई, जगन्नाथपुर व नोवामुंडी क्षेत्र काम में लगी है. हाथी का लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, ताकि उसे सुरक्षित उसके कॉरिडोर में भेजा जा सके. ज्ञात हो कि झुंड से बिछड़ा उक्त हाथी बीते गुरुवार (एक जनवरी, 2026) की रात से दहशत का पर्याय बना हुआ है. छह दिनों में 17 ग्रामीणों की जान ले चुका है. वहीं, करीब एक दर्जन ग्रामीण घायल हुए हैं.

दिनभर फैलती रही अफवाह भटकती रही टीम : डीएफओ

चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि टीम बुधवार से क्षेत्र में कैंप कर रही है. हाथी के अमूक स्थान पर होने की अफवाह फैल रही है. जब टीम वहां पहुंचती है, तो हाथी नहीं दिखता है. उक्त मस्त हाथी की तलाश में बंगाल से 20 सदस्यीय एक्सपर्ट टीम सहित कोल्हान के विभिन्न वन विभाग के 6-7 क्यूआरटी की टीम भी लगी है. प्रत्येक टीम में 10- 10 सदस्य शामिल हैं. हाथी का लोकेशन ट्रेस होते ही उसे ट्रेंकुलाइज कर कॉरिडोर तक पहुंचाने का काम किया जायेगा.

माइकिंग कर लोगों को किया जा रहा अलर्ट

टीम ड्रोन और ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी हुई है. विभाग का कहना है कि हाथी अभी भी क्षेत्र में मौजूद है. पूरी तरह खतरा टला नहीं है. माइकिंग कर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है. बीते एक सप्ताह से लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय है.

सिर्फ रात में बाहर निकल रहा हाथी.

उक्त हाथी खतरनाक हो चुका है. वह सिर्फ रात में निकलता है. दिन में छिप जाता है. रात में घटना के बाद आगे बढ़ जाता है. रास्ते में झोपड़ियां, खलिहान और कुंभा को निशाना बना रहा है. यह व्यवहार संकेत देता है कि हाथी मस्त (मेटिंग) अवस्था में है.

शाम होते ही सन्नाटा घरों में कैद हो रहे लोग

जगन्नाथपुर. यमराज बनकर घूम रहे हाथी के भय से शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा पसर जा रहा है. लोग घरों में कैद हो जा रहे हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस संघर्ष की मुख्य वजह जंगलों की अंधाधुंध कटाई है. हाथियों के रहने की जगह सिमट रही है. जंगल में भोजन नहीं मिलने के कारण हाथी बस्तियों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि हाथी बिना किसी उकसावे के हिंसक हो रहा है.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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