Chaibasa News : भाषा अंग्रेजी, पर दिल से हिंदी को अपनाया, जिया और आगे बढ़ाया

हिंदी दिवस के अवसर पर अक्सर ऐसे लोग हमें प्रेरणा देते हैं, जिनकी भाषा हिंदी नहीं होती,

चक्रधरपुर.

हिंदी दिवस के अवसर पर अक्सर ऐसे लोग हमें प्रेरणा देते हैं, जिनकी भाषा हिंदी नहीं होती, फिर भी वे इस भाषा को अपनाकर न केवल सीखते हैं, बल्कि उसे अपने जीवन और कार्यक्षेत्र का अहम हिस्सा बना लेते हैं. चक्रधरपुर के पोटका निवासी और रेलवे के पीआरडी इलेक्ट्रिक विभाग में कार्यरत डोमनिक जुड तांती भी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं. डोमनिक एक एंग्लो-इंडियन परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनकी भाषा अंग्रेजी है. मां अंग्रेज मूल की हैं और पिता ओड़िया हैं. घर में बचपन से अंग्रेजी ही बोली जाती रही है. इसके बावजूद उन्होंने स्नातक तक हिंदी विषय में पढ़ाई की और धीरे-धीरे हिंदी से उनका भावनात्मक जुड़ाव गहराता चला गया.

हिंदी ने मुझे जोड़ा है, सीमित नहीं किया : डोमनिक: डोमनिक का मानना है कि भाषा किसी की पहचान को सीमित नहीं करती, बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम होती हैं वे कहते हैं, मैंने महसूस किया कि हिंदी के माध्यम से मैं अपने सहकर्मियों, मित्रों और आम लोगों से अधिक सहजता से जुड़ पाता हूं. आज मेरी रोजमर्रा की जिंदगी 90% हिंदी पर ही आधारित है. भले ही घर में अंग्रेजी बोली जाती हो. रेलवे कार्यालय में जब भी ड्राफ्टिंग की जरूरत होती है, तो वे न सिर्फ अंग्रेजी में बल्कि हिंदी में भी दक्षता के साथ काम करते हैं. उनके सहकर्मी भी उनकी सहज हिंदी बोलचाल की सराहना करते हैं.

एकता और विविधता का पुल है हिंदी

डोमनिक मानते हैं कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की विविधता और एकता का मजबूत सेतु है. उनका मानना है कि नयी पीढ़ी को हिंदी के महत्व को समझना चाहिए और तकनीक व शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए. डोमनिक जुड तांती कहते हैं भाषा चाहे जो हो, हिंदी अपनाकर हम अपनी जड़ों से जुड़ सकते हैं और देश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बना सकते हैं.

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By AKASH

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