प्लास्टिक का उपयोग कम करें, जल संरक्षण को दें प्राथमिकता: डीसी

चाईबासा. स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान का शंखनाद, 5 जून तक चलेगा विशेष जागरुकता कार्यक्रम

चाईबासा.

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जन-जागरुकता बढ़ाने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक बड़े अभियान की शुरुआत की गयी है. सोमवार को जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में “स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान ” को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. यह विशेष अभियान 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना और ग्रामीण स्तर पर पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को प्रोत्साहित करना है. बैठक में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता (पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल), कनीय अभियंता और कोऑर्डिनेटर उपस्थित थे, जबकि वर्चुअल माध्यम से जिले के सभी पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव भी कार्यक्रम से जुड़े.

एक पेड़ मां के नाम और एक पेड़ बेटी के नाम लगाने का सुझाव

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी के माध्यम से ही स्वच्छ गांव और सुरक्षित जलवायु के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने आम जनता से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, जल संरक्षण को प्राथमिकता देने और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील की. अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ””””एक पेड़ मां के नाम और एक पेड़ बेटी के नाम”””” लगाने का अनूठा सुझाव दिया गया.

जन जागरुकता के लिए ””””रेड और ग्रीन डॉट”””” का होगा इस्तेमाल

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पंचायत प्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों, सहिया, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है. बैठक के दौरान जन-जागरुकता के लिए एक हाथ में रेड डॉट (माहवारी स्वच्छता व चुप्पी तोड़ो संदेश के लिए) तथा दूसरे हाथ में ग्रीन डॉट (पर्यावरण व स्वच्छता के लिए) का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया. इसके साथ ही सभी को माहवारी स्वच्छता और मलेरिया उन्मूलन में सहयोग करने की शपथ दिलाई गई. अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए उपायुक्त द्वारा समाहरणालय परिसर से जागरुकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. इस दौरान अधिकारियों ने हस्ताक्षर पट्टिका पर हस्ताक्षर किए और सेल्फी व बैलून के जरिए संदेश प्रसारित किया.

अभियान के तहत गांवों में संचालित होंगी ये प्रमुख गतिविधियां:

विशेष साफ-सफाई :

गांवों में सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों, बाजारों और जल स्रोतों (तालाब, कुएं, चापाकल) के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान और सामुदायिक श्रमदान.

जागरुकता रैलियां:

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के विषय पर ग्राम सभाओं का आयोजन, प्रभात फेरी और जागरुकता रैलियां निकालना.

प्लास्टिक मुक्त गांव:

सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद करने के लिए विशेष जन-जागरुकता अभियान चलाना.

वेस्ट मैनेजमेंट:

घर-घर जाकर ग्रामीणों को गीला और सूखा कचरा अलग करने (कचरा पृथक्करण) तथा ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी देना.

स्कूली प्रतियोगिताएं:

विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बीच चित्रकला, निबंध, भाषण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन करना.

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लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

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