चक्रधरपुर. चक्रधरपुर नगर परिषद क्षेत्र में 23.22 लाख रुपये की लागत से बने 9 मॉड्यूलर टॉयलेट पानी के अभाव में बेकार पड़े हैं. प्रत्येक टॉयलेट पर 2.58 लाख रुपये खर्च किये गये थे. पर रखरखाव और पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण अब ये कूड़ेदान में तब्दील हो गये हैं. त्रिशूल चौक और भारत भवन के समीप के शौचालयों को खोलने का प्रयास भी हुआ, पर गंदगी के कारण फिर से बंद करना पड़ा. 2018 में पांच और 2023 चार शौचालय बनाये गये थे. इन शौचालयों में आज तक पानी का कनेक्शन नहीं दिया गया.
रखरखाव के अभाव में टॉयलेट में पसरी गंदगी :
स्वच्छ भारत मिशन के तहत चक्रधरपुर को स्वच्छता पुरस्कार मिल चुका है, पर यहां स्थिति कुछ और बयां कर रही है. स्वच्छ भारत के तहत चक्रधरपुर के त्रिशूल चौक समीप, रेलवे हाइस्कूल मैदान के पास, एलआइसी बिल्डिंग के पास, भारत भवन चौक के वन विश्रामागार के मुख्य द्वार के पास, बंगालटांड़ जाने वाले रास्ते में, पोड़ाहाट स्टेडियम के मुख्य द्वार के पास, गुरुद्वारा के पास, पोस्ट ऑफिस रोड में मॉड्यूलर टॉयलेट बनाये गये हैं. पर सफाई और रखरखाव के अभाव से टॉयलेट बंद पड़े हैं.महिलाओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं :
शहर में महिलाओं की सुविधाओं को लेकर नगर परिषद का रवैया उदासीन है. पूरे नगर परिषद क्षेत्र में महिलाओं के लिए एक भी ””””पिंक टॉयलेट”””” नहीं है. यह स्थिति तब है जब नगर परिषद ने सामुदायिक शौचालयों पर तीन करोड़ से अधिक की राशि खर्च की है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं बाजार पहुंचती हैं और सैकड़ों महिलाएं मॉल व दुकानों में काम करती हैं, पर उनके लिए सुरक्षित और अलग व्यवस्था नहीं है.
12 महिला वार्ड पार्षदों के बावजूद सुविधाओं का टोटा :
शहर में कुल 23 वार्ड हैं. इसमें 12 वार्डों का प्रतिनिधित्व महिलाओं के हाथ में है. पर हैरानी की बात है कि इसके बावजूद शहर में महिलाओं के लिए अलग से एक भी पिंक शौचालय नहीं है. आधी आबादी के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है.- दूर-दराज से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए शहर के नौ स्थानों पर मॉड्यूलर टॉयलेट का निर्माण किया गया है. इसके अलावा आधुनिक सामुदायिक शौचालय भी बनाये गये हैं. लोग शौचालय का उपयोग कर साफ सुथरा रखें. जहां भी सफाई की आवश्यकता है, उसे संज्ञान में लेकर शीघ्र ही सफाई कर दी जायेगी.
