Chaibasa News : हाथी के खौफ में कई परिवारों ने गांव छोड़ा, लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे ग्रामीण
मझगांव. वन विभाग की 55 सदस्यीय टीम ड्रोन के साथ डटी, पर हाथी का सुराग नहीं
मझगांव.
पश्चिम सिंहभूम जिले में नौ दिनों तक (एक जनवरी से नौ जनवरी) यमराज बनकर घूम रहे हाथी ने एक वनकर्मी समेत 20 ग्रामीणों की जान ले ली. वहीं, करीब 13 ग्रामीण घायल हो गये. घटना के बाद जंगल से सटे गांवों के लोगों की नींद उड़ गयी है. हाथी के हमले में मारे गये लोगों के शवों को देखने वालों की रूह कांप उठी थी. हालांकि, बीते करीब 72 घंटे से हाथी का पता नहीं है. इसके बावजूद ग्रामीण चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं. मझगांव प्रखंड के तिलोकुटी में हाथी ने नौ जनवरी को तीन लोगों की जान ली थी. घटना के चार दिनों बाद भी तिलोकुटी समेत आसपास के गांवों में सन्नाटा और दहशत पसरा हुआ है. गांवों की गलियां डरावना लग रही हैं. दरअसल, प्रभावित परिवारों ने डर से घर छोड़ दिया है. कई लोग वापस लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.दोहरी मार : खाली घरों से बकरे, मुर्गियां व कीमती सामान चोरी
हाथी के डर से आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने वाले ग्रामीणों पर दोहरी मार पड़ी है. सोमवार को कुछ परिवार डरे-सहमे अपने घर लौटे. घर खाली पाकर चोरों ने उनके बकरे, मुर्गियां और कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया था. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ ””””यमराज”””” बनकर हाथी घूम रहा है, तो दूसरी तरफ असुरक्षा का फायदा उठाकर चोर उनकी संपत्ति लूट रहे हैं.
महिलाओं व बच्चों संग पक्के मकानों में शरण ली, मशाल लेकर रतजगा कर रहे पुरुष
मझगांव प्रखंड के तिलोकुटी, बेनीसागर, जानुमपी, पोंडुवाबुरु, हल्दिया और कुबासाई जैसे सीमावर्ती गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है. शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है. सुरक्षा के मद्देनजर महिलाओं और बच्चों को गांव के कुछ सुरक्षित पक्के मकानों में शिफ्ट कर दिया गया है. पुरुष टोलियां बनाकर रात भर मशाल जलाकर ””””रतजगा”””” कर रहे हैं.दिन में खेत व बागान में नहीं जा रहे ग्रामीण, खेती हुई चौपट
झारखंड-ओडिशा सीमा पर बसे गांवों की आजीविका कृषि पर आधारित है. पहले ग्रामीण ऊंचे पेड़ों पर मचान और कुंभा बनाकर रात भर अपनी फसलों की रखवाली करते थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि लोग दिन के उजाले में भी अपने सब्जी बागानों और खेतों की ओर रुख करने से कतरा रहे हैं. प्रशासन और वन विभाग की सुस्ती से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि जब तक हाथी को पकड़कर दूर नहीं किया जाता, उनका जीवन दांव पर लगा रहेगा.
घर की चौखट लांघने से कतरा रहे
मझगांव में जंगल से सटे गांवों में ज्यादातर लोग किसी तरह हिम्मत जुटाकर घरों में रह रहे हैं. हालांकि, हाथी के भय से वे अपने घर की चौखट लांघने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों की आंखों में अपनों को खोने का गम और दोबारा हमले का डर साफ दिख रहा है. ग्रामीणों की बात में दर्द और खौफ सामने आया है.मुखिया ने झाड़ियों की सफाई करायी, 15 स्ट्रीट लाइट लगवायी
खड़पोसके मुखिया प्रताप चातार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घटनास्थल के आसपास की झाड़ियों की सफाई करवायी है. क्षेत्र में 15 नयी स्ट्रीट लाइटें लगवायी हैं, ताकि अंधेरे का लाभ उठाकर हाथी दोबारा हमला न कर सके.हाथी को ट्रेस करने में वन विभाग को नहीं मिली सफलता
दंतैल हाथी को पकड़ने या खदेड़ने में वन विभाग अब तक पूरी तरह विफल रहा है. विभाग के 55 कर्मियों की टीम और कई अधिकारी कैंप कर रहे हैं. हाथी का लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है, लेकिन घने जंगलों और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
