संवाददाता, चक्रधरपुर
चक्रधरपुर प्रखंड में मलेरिया का प्रकोप एक बार फिर चिंता का विषय बनता जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जनवरी से 14 जुलाई तक प्रखंड में कुल 285 मलेरिया मरीज मिल चुके हैं. लगातार सामने आ रहे मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित गांवों में बाईपी, जयपुर, भरनिया, धनगांव, इंदकांटा, तूइया, बिंदासरजम, टोकाटोला, बाईपीड़, कुलीतोड़ाग, दलकी, चिटपील, सारजमडीह, कोटसोना, कोटवा, जमीद और धनगांव सहित कई अन्य गांव शामिल हैं.इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार सर्वे, जांच और जागरूकता अभियान चला रही है.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 34, फरवरी में 44, मार्च में 27, अप्रैल में 50, मई में 53, जून में 62 तथा 14 जुलाई तक 15 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है. जून में सबसे अधिक मरीज मिलने से संक्रमण के बढ़ते खतरे का अंदेशा जताया जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रहा है.बुखार से पीड़ित लोगों का तत्काल रक्त परीक्षण कराया जा रहा है और संक्रमित मरीजों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही मच्छरदानी के उपयोग, घरों के आसपास जलजमाव नहीं होने देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की जा रही है.
चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर अंशुमन शर्मा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसी शिकायत हो तो बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं. समय पर जांच और उपचार से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है. वहीं ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों में नियमित फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, ताकि बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके.
