Chaibasa News : विस्थापन से आदिवासियों की आजीविका को नुकसान

चक्रधरपुर : ‘कोल्हान में विस्थापन’ विषय पर सेमिनार का आयोजन, मुख्य वक्ता डॉ अर्पित सुमन ने कहा

चक्रधरपुर. कोल्हान की सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना को बल प्रदान करने वाला कोल्हान सेमिनार का छठा संस्करण रविवार को दुंबीसाइ स्थित अर्जुना हॉल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ. इस बार सेमिनार का विषय ””””कोल्हान में विस्थापन”””” रखा गया. इस पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और बुद्धिजीवियों ने गहन मंथन किया. सेमिनार का शुभारंभ कार्यकारिणी सदस्य रमेश जेराई ने साल के पौधे में जल अर्पित कर किया. यह आदिवासी संस्कृति की प्रकृति-प्रेमी भावना का प्रतीक बना. सत्यजीत हेंब्रम ने सेमिनार की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गयी. अब तक इसका सफर कितना सार्थक रहा है. इसके बाद आयोजन टीम के सदस्यों ने परिचय दिया. मंच संचालन करते हुए पंकज बांकिरा ने इस वर्ष के विषय कोल्हान में विस्थापन की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और विचार-विमर्श का सूत्रपात किया.

शोध पत्रों के माध्यम से गहन विश्लेषण :

अकादमिक सत्र में पांच शोध पत्र प्रस्तुत किये गये. इसमें विस्थापन के विविध पहलुओं को सामने लाया गया. बीर सिंह बिरुली ने ईचा खरकई डैम, आदिवासी मूलवासियों की अस्मिता, अस्तित्व और पहचान की लड़ाई विषय पर विस्तृत शोध पत्र प्रस्तुत किया. उन्होंने बांध प्रभावित समुदायों की संघर्षपूर्ण स्थिति और पहचान पर मंडराते संकट को उजागर किया. मुक्ता कुरली ने विकास के नाम पर विस्थापन, झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में बांध निर्माण का आलोचनात्मक अध्ययन पर प्रस्तुति दी. उन्होंने मौजूदा विकास की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए इसके सामाजिक दुष्प्रभावों का विश्लेषण किया. डॉ अर्पित सुमन टोप्पो ने कोल्हान क्षेत्र में विस्थापन के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक विषय पर एक व्यापक दृष्टिकोण रखा. उन्होंने बताया कि विस्थापन आदिवासी समाज की संरचना, संस्कृति और आजीविका पर गहरा असर डालता है. विस्थापन से आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका का नुकसान होता है. रियंस सामड ने खरकाई डैम-सामाजिक आंदोलन और संघर्ष पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत कर आंदोलन के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला. बेस बुढ़िउली ने भारत में भूमि अधिग्रहण और आदिवासी विस्थापन के कानूनी एवं नीतिगत पहलुओं की जानकारी दी. इस अवसर पर रमेश जेराई, दीपक तुबीड, बेस बुढ़िउली, पंकज बांकिरा, सत्यजीत हेंब्रम, और रवींद्र गिलुवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वहीं कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल, शीतल बागे, मधुसूदन बानरा, पूनम देवगम तुबीड, सुभाष चंद्र सिंकू आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >