Chaibasa News : ''''झारखंडी परंपरा, प्रकृति संरक्षण व एकता का संदेश देता है करम परब''''

भाइयों की लंबी उम्र, सेहतमंद और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी बहनें

चाईबासा. कोल्हान विश्वविद्यालय के टीआरएल विभाग में करम परब की पूर्व संध्या पर करम मिलन समारोह सह करम गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है. करम गीत प्रतियोगिता में 25 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रथम छायारानी महतो, द्वितीय मेनका महतो, तृतीय रुइबारी माझी,चतुर्थ रश्मि महतो को मिला. इन सभी छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. प्रतियोगिता में निर्णायक मंडली में प्रो. मनसा महतो, जेएलएन कॉलेज चक्रधरपुर एवं युवा गायक शत्रुघ्न महतो उपस्थित थे. मौके पर अतिथियों का स्वागत करम पेड़ और अंगवस्त्र देकर किया गया.

ये हुए सम्मानित :

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थी रहे सुनील मुर्मू, जिन्होंने जेपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त की, उन्हें सम्मानित किया गया. विभाग के ही विद्यार्थी संजीव कुमार मुर्मू, जिनका चयन भारत के संसद भवन में संताली भाषा के अनुवादक के रूप में हुआ, उन्हें भी विभाग की ओर से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर विभाग के विभिन्न विषयों संथाली, हो एवं कुड़मालि में शिक्षण सहायक के रूप में सेवा दे रहे मेधावी छात्र धनुराम मर्डी, गोनो आल्डा एवं वीणास कुमारी को भी सम्मानित किया गया.

झारखंडी संस्कृति की अमूल्य धरोहर है करम :

केयू के कुलसचिव डॉ. परशुराम सियाल ने कहा कि करम परब प्रकृति पर्व है. यह पर्व हमें प्रकृति के साथ चलने की प्रेरणा देता है और सामूहिकता की भावना को प्रदर्शित करता है. सीसीडीसी डॉ. आरके चौधरी ने करम परब पर चर्चा करते हुए कहा कि यह पर्व पूरे देश में मनाया जाता है और इससे प्रकृति संरक्षण का संदेश मिलता है. मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ. तपन खानरा ने करम परब की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला. समाजसेवी डॉ. आनंत महतो ने कुड़मी समाज में करम परब के महत्व को रेखांकित किया. कुलानुशासक डॉ. राजेंद्र भारती ने कहा कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग विवि की अमूल्य धरोहर है. डॉ. एमए खान ने करम परब के शुभ अवसर पर सभी को बधाई दी. इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि करम परब हमारी झारखंडी संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और इसे संरक्षित रखना हम सबका कर्तव्य है. अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग को बधाई दी. मौके पर कुड़मालि भाषा के प्राध्यापक सुभाष चंद्र महतो मौजूद थे.

ये रहे मौजूद :

डीएसडब्ल्यू डॉ संजय कुमार यादव, हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. भारती कुमारी, मानव शास्त्र विभाग की डॉ मीनाक्षी मुंडा, डॉ बसंत चाकी, मयंक कुमार, भूगोल विभाग के डॉ कंचन कुमार, संस्कृत विभाग की दानगी सोरेन, विभाग के हो संताली कुड़मालि के मेधावी छात्र दिकू हांसदा, संगीता महतो, रामदेव बोयपाई, कुड़मालि के विद्यार्थी, हो के विद्यार्थी, संथाली भाषा के विद्यार्थी मौजूद थे.

भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक करम पर्व आज

चाईबासा व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भादो एकादशी करमा पर्व बुधवार को मनाया जायेगा. बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सेहतमंद और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी. करमा पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति पूजन का प्रतीक है. ज्ञात हो कि शहर व आसपास के क्षेत्रों में धूमधाम से करमा पर्व मनाया जाता है. चाईबासा में आदिवासी उरांव समुदाय के साथ आदिवासी मुंडा समाज और कुर्मी समाज करमा पर्व धूमधाम से मनाते हैं. करमा पर्व आदिवासी उरांव समाज का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है. पर्व को लेकर लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल है. पर्व के तहत बुधवार की शाम जंगल से करम डाली को लाकर घर के आंगन व अखाड़ा में गाड़ा जायेगा. पाहन करम राजा की पूजा-अर्चना करेंगे. वहीं, कर्मा-धरमा दो भाइयों की कथा सुनायी जायेगी. चाईबासा के आदिवासी उरांव समुदाय के पुलहातु, नदीपार मोचीसाई, कुम्हारटोली, तेलंगाखुरी, बनटोला, बरकंदाजटोली व मेरी टोला में अखाड़ा को आकर्षक तरीके से सजाया गया है. वहीं, चाईबासा के छोटा नीमडीह, गुटुसाई, टुंगरी आदि क्षेत्रों में करम पूजा की जायेगी.

समुदाय परंपरा का रखता है ख्याल:

एक दिन पहले कर्मडाल पेड़ को पान और सुपारी के साथ निमंत्रण दिया जाता है. पूजा के दिन पेड़ की शाखा को तोड़कर लाया जाता है. घरों में पुआ-पकवान बनाये जाते हैं. महिलाएं पूजा स्थल पर जाकर, पाहन (पुजारी) के द्वारा विधिपूर्वक पूजा करती हैं. सभी महिलाएं अपने घर लौटकर प्रसाद ग्रहण करती हैं. रात में ढोल-मांदर के साथ महिलाएं और पुरुष झूमर खेलते और गीत गाते हैं. अगले दिन सुबह कर्मडाल को दूध, दही और अनाज अर्पित कर भोजन कराया जाता है. उसे नदी में विसर्जित किया जाता है. इस प्रकार करमा पूजा संपन्न होती है.

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By ATUL PATHAK

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