झींकपानी. एसीसी सीमेंट प्लांट, झींकपानी में प्रबंधन द्वारा जारी की गयी बंदी की नोटिस की अवधि पूरी हो चुकी है. कंपनी की ओर से 15 जून को नोटिस जारी कर 16 अगस्त से प्लांट बंद करने की घोषणा की गयी थी. हालांकि, निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद 16 अगस्त को ठेका मजदूरों को प्लांट में काम पर लिया गया, जबकि स्थायी मजदूरों को काम पर नहीं बुलाया गया है. इस संबंध में कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई सूचना जारी नहीं की गयी है.
1 मई से ठप है उत्पादन और 13 मई से डिस्पैच
झींकपानी सीमेंट वर्क्स में पिछले 1 मई से उत्पादन ठप है, जबकि 13 मई से माल का डिस्पैच भी पूरी तरह बंद है. प्लांट में कार्यरत लगभग 1600 मजदूरों के समक्ष रोजगार का संकट गहरा गया है. आजादी से पहले वर्ष 1946 में स्थापित इस 80 साल पुराने प्लांट के बंद होने से क्षेत्र के हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे.
ठेका मजदूरों को मिल रहा 15 दिन काम
कारखाने की बंदी के विरोध में मजदूरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और छोटे-बड़े व्यापारियों ने भी आवाज उठायी है. सभी इस प्लांट को सुचारू रूप से चलाने की मांग प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय श्रम आयोग और जिला प्रशासन से कर चुके हैं. इस मामले को लेकर गत 31 मई को मंत्री दीपक बिरुवा और चाईबासा उपायुक्त की उपस्थिति में त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी, जो बेनतीजा रही थी. वार्ता के दौरान यह सहमति बनी थी कि उत्पादन और डिस्पैच ठप रहने के बावजूद ठेका मजदूरों को कारखाना बंदी तक महीने में 15 दिन काम पर रखा जायेगा. इसके तहत उन्हें प्लांट में काम पर बुलाया जा रहा है.
स्थायी और ठेका मजदूरों की स्थिति
ठेका मजदूरों की संख्या लगभग 1500 है. मजदूरों का कहना है कि पीएफ, ग्रेच्युटी और कंपनी से मिलने वाले अन्य लाभों को लेकर अभी तक सहमति नहीं बनी है. इस कारण बंदी नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद भी इन्हें काम पर लिया जा रहा है. स्थायी मजदूरों की संख्या 74 है. इनमें से कुछ मजदूरों का तबादला एसीसी की अन्य इकाइयों में कर दिया गया है, जबकि शेष मजदूरों को नियमानुसार मिलने वाले लाभ देकर काम से मुक्त किए जाने की चर्चा है. चर्चा है कि केंद्र सरकार की ओर से कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है, जिसके चलते प्लांट 16 अगस्त को पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है. दूसरी ओर, मजदूरों का मानना है कि प्लांट की वर्तमान स्थिति को देखते हुए जल्द ही पुनः त्रिपक्षीय वार्ता हो सकती है. कारखाना बंद होने से न केवल हजारों लोगों की आजीविका पर संकट आयेगा, बल्कि औद्योगिक नगरी झींकपानी की पहचान पर भी असर पड़ेगा. यही कारण है कि स्थानीय निवासी, मजदूर, व्यापारी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग हर हाल में कारखाना चालू रखने की मांग कर रहे हैं.
