Chaibasa News : स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था- दोषी बख्शे नहीं जायेंगे, दो माह बाद भी न रिपोर्ट आयी, न कार्रवाई हुई

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाने पर हुआ था हंगामा

चाईबासा. सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में अक्तूबर, 2025 को थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित ब्लड चढ़ाने पर सात बच्चे एचआइवी पॉजिटिव पाये गये थे. इस मामले में सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ सुशांतो कुमार माझी, ब्लड बैंक के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दिनेश कुमार सावैयां को सस्पेंड कर दिया था. वहीं, ब्लड बैंक के अनुबंध कर्मी तकनीशियन मनोज कुमार को सेवामुक्त कर दिया गया था. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा आकर जांच की थी. उन्होंने कहा था कि हम किसी को नहीं बख्शेंगे. अभी कुछ दोषी अधिकारियों को निलंबित किया है. अगर कोई अनियमितता मिली, तो उन्हें गिरफ्तार भी करेंगे. हालांकि, दो महीने बाद भी न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न किसी पर कार्रवाई हुई. मंत्री ने कहा था कि जब तक जांच पूरी नहीं होगी, पुष्टि करना मुश्किल है कि बच्चों में संक्रमण ब्लड बैंक के रक्त से हुआ था या किसी और जरिए से? उन्होंने कहा था कि सटीक जांच में कम से कम चार हफ्ते लगने की संभावना है.

चाईबासा में ब्लड जांच बंद कर एमजीएम पर बढ़ाया बोझ :

अक्तूबर, 2025 में चाईबासा ब्लड बैंक की लापरवाही सामने आने के बाद सरकार ने चाईबासा में ब्लड जांच को बंद कर दिया. इसके बाद डोनरों को ब्लड जांच के लिए एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर भेजा जाता है. इससे एमजीएम पर बोझ बढ़ गया. वहीं, जरूरतमंद की परेशानी बढ़ गयी है. वहां से जांच होकर ब्लड आने के बाद मरीजों को ब्लड चढ़ाया जाता है. इससे पहले ब्लड बैंक में ब्लड की जांच रैपिड किट से की जाती थी. सरकार ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया था. राज्य भर के प्रत्येक ब्लड बैंक का ऑडिट कराने का आदेश दिया था.

एमजीएम से 1192 मरीजों को मिला रक्त :

अक्तूबर 2025 से चाईबासा से एमजीएम में कुल 1274 यूनिट ब्लड भेजा गया. चाईबासा में 1192 मरीजों के बीच रक्त वितरित किया गया. हालांकि, इस प्रक्रिया में पश्चिमी सिंहभूम के मरीजों की परेशानी दोगुनी हो गयी है. मरीज को रक्त की जरूरत पड़ने पर जमशेदपुर जाना पड़ता है. इसमें पैसे के साथ समय अधिक लग रहा है.

एक रक्तदाता के परिवार में पांच लोग एचआइवी संक्रमित मिले थे

अक्तूबर की घटना के बाद हुई प्रारंभिक जांच में पता चला था कि चाईबासा ब्लड बैंक के तीन रक्तदाता एचआइवी संक्रमित हैं. 259 ब्लड डोनर्स में एक डोनर परिवार के पांच सदस्य भी एचआइवी प्रभावित मिले थे. 2023 से 2025 के बीच चाईबासा ब्लड बैंक में कुल 259 लोगों ने रक्तदान किया.

गर्भवती को संक्रमित रक्त चढ़ाने के सवाल पर जांच की बात कही थी मंत्री ने :

तब स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि थैलेसीमिया के मरीजों को हर 15 दिन में रक्त की जरूरत होती है. वे अपने साथ रक्तदाता भी लाते हैं. हर मरीज का ब्लड ग्रुप अलग होता है. उनसे पूछा गया था कि क्या कुछ गर्भवती महिलाओं को भी ब्लड बैंक में रक्त चढ़ाया गया था, तो जवाब में मंत्री ने जांच जारी होने की बात कही थी.

हाइकोर्ट में याचिका दायर कर एफआइआर की मांग हुई थी

उक्त मामले में बीते दिनों झारखंड हाइकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गयी. इसमें आरोप लगाया गया कि अक्तूबर 2025 में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया से पीड़ित नाबालिग बच्चों को एचआइवी संक्रमित रक्त चढ़ाया गया. इस घटना को लेकर एफआइआर दर्ज करने की मांग की गयी. है. राज्य सरकार से घोषित 2 लाख रुपये का मुआवजा आजीवन इलाज और पुनर्वास के लिए अपर्याप्त है. यह मामला झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, विशेषकर ब्लड बैंक प्रबंधन की प्रणालीगत विफलताओं को उजागर करता है. अन्य राहतों के साथ-साथ हाइकोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की गयी थी.

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Author: ATUL PATHAK

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