जैंतगढ़: शनिवार को विद्यालयों का संचालन प्रातःकालीन और आधे बेला तक करने की मांग उठने लगी है. कोल्हान मामू संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष जमादार लागुरी ने झारखंड सरकार और शिक्षा विभाग से शनिवार को पूर्व की तरह सुबह की पाली में विद्यालय संचालित करने की मांग की है.
जमादार लागुरी ने कहा कि एकीकृत बिहार के समय से ही शनिवार को प्रातःकालीन स्कूल का संचालन होता आया है. उस समय शनिवार को आधे बेला तक पढ़ाई होती थी. पूर्व में शनिवार को सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक विद्यालय संचालित किया जाता था. करीब चार-पांच वर्ष पहले इस व्यवस्था को बंद कर शनिवार को पूर्णकालीन विद्यालय संचालन शुरू कर दिया गया. उन्होंने इसे व्यवहारिक रूप से गलत बताया.
दूर रहने वाले शिक्षकों और बच्चों को होती है परेशानी
जमादार लागुरी के अनुसार शनिवार को प्रातःकालीन विद्यालय संचालन होने से स्कूल के शिक्षक और छात्र आसानी से समय पर अपने घर लौट सकते थे. वर्तमान व्यवस्था में दूर रहने वाले शिक्षकों को शनिवार को घर जाने के लिए सीएल तक लेना पड़ता है. इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार का साप्ताहिक हाट भी काफी महत्वपूर्ण होता है. कोल्हान में साप्ताहिक हाट वर्षों से चली आ रही परंपरा है. शनिवार को बच्चे, अभिभावक और शिक्षक सप्ताह भर के लिए जरूरी सामान और अन्य सामग्री हाट से खरीदते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में साप्ताहिक हाट किसी पर्व की तरह माना जाता है. ऐसे में शनिवार को पूर्णकालीन विद्यालय संचालन से लोगों को परेशानी होती है.
पुरानी समय सारिणी लागू करने की मांग
प्रबुद्ध शिक्षाविद और समाजसेवी आमिर हिंदुस्तानी ने भी शनिवार को प्रातःकालीन विद्यालय संचालन की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि पूर्व में झारखंड में विद्यालयों का संचालन सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक होता था, जबकि शनिवार को सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक स्कूल चलता था. उनके अनुसार यह एक बेहतर समय सारिणी थी और इससे छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होती थी.
उन्होंने कहा कि दोपहर 2 बजे छुट्टी होने के बाद बच्चों को आराम, होमवर्क और खेलकूद के लिए पर्याप्त समय मिल जाता था. उन्होंने शिक्षा विभाग से पुरानी समय सारिणी को फिर से लागू करने की मांग की. साथ ही हर हाल में शनिवार को आधे बेला तक प्रातःकालीन विद्यालय संचालन की व्यवस्था बहाल करने की मांग की.
