चाईबासा. शहर के डोबरोसाई-गितिलपी रोड (मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड) और एनएच-75 (ई) पर दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध यानी ””””नो एंट्री”””” लगाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. प्रशासन की कथित अनदेखी से नाराज स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. मंगलवार को नो एंट्री आंदोलन समिति के बैनर तले एनएच-75 (ई) के किनारे स्थित सिंहपोखरिया गांव में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया गया. इस दौरान समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ बैठक की और आगामी ””””न्याय यात्रा”””” को सफल बनाने के लिए समर्थन मांगा.
दुर्घटनाओं का गढ़ बनती जा रही सड़क:
समिति के संयोजक और पूर्व बैंक मैनेजर रमेश बालमुचू ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सड़क की भयावह स्थिति पर चिंता जतायी. उन्हाेंने कहा कि भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन के कारण सड़क दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. औसतन हर माह 4 से 5 सड़क हादसे इस मार्ग पर हो रहे हैं.इससे कई राहगीरों और बाइक सवारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. इसी सड़क से रोजाना हजारों स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी गुजरते हैं. भारी वाहनों के कारण उनकी सुरक्षा हमेशा दांव पर लगी रहती है. श्री बालमुचू ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या से बेपरवाह बना हुआ है.
टाटा कॉलेज में तैयार हुई रणनीति
सिंहपोखरिया के बाद रमेश बालमुचू ने टाटा कॉलेज के पास विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक सामूहिक बैठक की. इस बैठक में रांची जाने वाली न्याय यात्रा की रूप-रेखा तैयार की गयी और अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम से जोड़ने पर चर्चा हुई. बैठक में रेयांस सामड, दुलमू बुड़ीउली, तिलक बारी, कुसुम केराई, बबलू सावैयां, रमेश सावैयां, सुशील कुमार पुरती, चंद्रमोहन बिरुवा, सनातन सावैयां समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
कोट
जब तक हम सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, सरकार अपनी कुंभकर्णी निद्रा से नहीं जागेगी. इसी न्याय के लिए हमें राजधानी रांची तक न्याय यात्रा निकालनी पड़ रही है.
