चाईबासा : सीआरपीएफ डीजी ने नक्सल विरोधी अभियान की समीक्षा कीअब सेंट्रल कमेटी के मिसिर बेसरा की टीम पर चौतरफा वार की तैयारी
जिला स्कूल परिसर स्थित सीआरपीएफ कैंप का दौरा कियासंवाददाता, चाईबासासीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र सिंह ने शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित जिला पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक की. उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा की. सीआरपीएफ और जिला पुलिस के आपसी समन्वय तथा भावी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई. डीजी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि नक्सल समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बेहद कारगर और ठोस कदम उठाये जायें. बताया गया कि अब सारंडा के जंगलों में मुख्य रूप से मिसिर बेसरा का दस्ता ही बचा रह गया है. सीआरपीएफ डीजी ने सुरक्षा बलों और जिला पुलिस को संयुक्त रूप से मिसिर बेसरा की टीम को ढूंढ निकालने और सारंडा को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाने का कड़ा टास्क सौंपा है.
25 नक्सलियों का सरेंडर बड़ी उपलब्धि
हाल में सारंडा के 25 नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि बताया गया. अधिकारियों ने रेखांकित किया कि जिला पुलिस और सीआरपीएफ के सारंडा जंगलों में चौतरफा घेराबंदी और निरंतर बढ़ते दबाव के कारण नक्सलियों को हथियार डालने पर विवश होना पड़ा. इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब सुरक्षा बलों का पूरा ध्यान सारंडा में सक्रिय नक्सलियों के शीर्ष नेता और सेंट्रल कमेटी के सदस्य मिसिर बेसरा की टीम पर केंद्रित हो गया है.सारंडा : सालभर में 35 नक्सली मुख्यधारा में लौटे
विदित हो कि इसी महीने 21 मई, 2026 को जिला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष सारंडा के 25 नक्सलियों ने एक साथ मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण किया था. इससे पूर्व वर्ष 2025 में भी भाकपा माओवादी संगठन के 10 सक्रिय नक्सलियों ने डीजीपी और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डाले थे. इस प्रकार अब तक सारंडा क्षेत्र के कुल 35 नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं.
