चक्रधरपुर: टोकलो रोड स्थित 'द पार्क रैन अस्पताल' में इलाज के दौरान सोनुआ निवासी सोना राम हेम्ब्रम की मौत के बाद गुरुवार को माहौल पूरी तरह गरमा गया. मृतक के परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया और प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. परिजनों की मांग है कि इलाज में खर्च हुए लाखों रुपये वापस किए जाएं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच हो.
जटिल ओपन ब्रेन सर्जरी और अस्पताल का दावा
घटना से पहले अस्पताल प्रबंधन ने एक जटिल ओपन ब्रेन सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने का दावा किया था. ब्रेन हेमरेज से पीड़ित सोनाराम हेम्ब्रम को गंभीर और बेहोशी की अवस्था में अस्पताल लाया गया था. डॉ. दीपक के नेतृत्व वाली न्यूरो टीम ने करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन किया था. अस्पताल का कहना था कि चक्रधरपुर में इस स्तर की जटिल सर्जरी पहली बार हुई है और मरीज वेंटिलेटर से बाहर आकर तेजी से रिकवरी कर रहा था. उस वक्त प्रबंधन ने यह भी बताया था कि आर्थिक तंगी के बावजूद बिना अग्रिम भुगतान के मरीज की जान बचाने को प्राथमिकता दी गई थी.
सफल ऑपरेशन के बाद अचानक मौत पर उठे सवाल
ऑपरेशन सफल बताए जाने के कुछ समय बाद अचानक सोना राम हेम्ब्रम की मौत हो जाने से परिजन भड़क उठे. परिजनों का मुख्य आरोप है कि यदि सर्जरी सफल थी और मरीज सुधर रहा था, तो उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? उनका यह भी आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें मरीज से मिलने नहीं दिया गया और स्वास्थ्य स्थिति छुपाई गई. इसके अलावा, उनकी मौजूदगी के बिना सीपीआर देने और मौत के 24 घंटे बाद शव के खराब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ने पर परिजनों ने गहरी नाराजगी जताई.
गरीब मजदूर परिवार की न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार का कहना है कि सोना राम हेम्ब्रम एक साधारण मजदूर थे. परिवार ने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी जोड़कर इलाज के लिए लाखों रुपये जुटाए थे. अब जब मरीज की जान नहीं बच सकी, तो परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है. उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इन सभी आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया साजिश
इस पूरे विवाद पर द पार्क रैन अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. रमन ने परिजनों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि सोची-समझी साजिश के तहत अस्पताल की छवि को धूमिल किया जा रहा है. डॉ. रमन ने स्पष्ट किया कि सर्जरी से पहले परिजनों से विधिवत लिखित सहमति ली गई थी, जिसका वीडियो रिकॉर्ड भी मौजूद है. सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी की गई थीं. प्रबंधन ने परिजनों से अपील की है कि वे गलतफहमी दूर करने के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करें.
