Chaibasa News : आत्महत्या रोकने को शैक्षणिक समुदाय में जागरुकता जरुरी

कोल्हान विश्वविद्यालय के पीजी मनोविज्ञान विभाग में बुधवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया.

चाईबासा .

कोल्हान विश्वविद्यालय के पीजी मनोविज्ञान विभाग में बुधवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया. विभाग की अध्यक्ष डॉ लालती तिर्की ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस प्रतिवर्ष 10 सितंबर को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी. उन्होंने कहा कि आत्महत्या एक सामाजिक समस्या है. इसका संबंध मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है. आत्महत्या की रोकथाम में शैक्षणिक समुदाय में जागरुकता पर ध्यान देना आवश्यक है. इस क्षेत्र में परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक की भूमिका महत्वपूर्ण है. मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर धर्मेंद्र रजक ने कहा कि जीवन महत्वपूर्ण है, इसे व्यर्थ न करें. आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र को प्रभावित करती है. आत्महत्या से पूर्व व्यक्ति में शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते हैं. उनको पहचानने पर बल दिया गया. इससे हम कई जान बचा सकते हैं. इस अवसर पर मनोविज्ञान के विभाग के टीचिंग असिस्टेंट रघुनाथ ने आत्महत्या के कारणों को बताया. इस अवसर पर मनोविज्ञान के छात्र-छात्राएं मौजूद थे.

कॉलेजों में सुविधाओं की कमी, एबीवीपी का आंदोलन 16 को

चाईबासा.

कोल्हान विश्वविद्यालय व कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं. ज्ञापन सौंपने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिलता है. इसके खिलाफ 16 सितंबर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आंदोलन करेगी. कोल्हान विभाग छात्रा प्रमुख सविता पिंगुवा ने कहा कि मझगांव कॉलेज समेत अन्य कॉलेज मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदाधिकारी मौन बैठे हैं. इस कारण समस्या का समाधान होने का कोई नजर नहीं आ रहा. विश्वविद्यालय बनाने का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को हायर एजुकेशन मिले. इस संबंध में मंगलवार को केयू के कुलपति कार्यालय में पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया. जिला संयोजक अविनाश कुम्हार, जादू लोमगा, तनुश्री बानरा, सुरेश बिरुवा, लखन पिंगुवा आदि उपस्थित रहे. पूर्व प्रदेश सह मंत्री शशिभूषण ने कहा कि विश्वविद्यालय बने 16 वर्ष हो गये. दुर्भाग्य है कि आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. अधिकारी एसी में बैठ कर मजा ले रहे हैं. विद्यार्थी पसीना से तर-बतर होकर अंधेरे में परीक्षा लिख रहे हैं.

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Author: AKASH

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