चाईबासा.
चाईबासा सिविल कोर्ट और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मो शाकिर के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इस दौरान चाईबासा न्यायालय में नौ और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में तीन न्यायपीठों का गठन किया गया. इसमें 128985 मामलों का निष्पादन कर 65,65,86,353 (पैंसठ करोड़ पैंसठ लाख छियासी हजार तीन सौ तिरपन रुपये ) का समायोजन किया गया. न्यायाधीशों ने मामलों की सुनवाई करते हुए प्री लिटिगेशन के 125776 मामले, जिसमें बैंक से संबंधित 1052 वाद, राजस्व के 4901 तथा अन्य 119823 और विभिन्न न्यायालयों में लंबित 3209 मामलों जिसमें आपराधिक शमनीय (कंपाउंडबल) के 2036 वाद, बिजली विभाग से संबंधित 158, श्रम विभाग से संबंधित 5, मोटर दुर्घटना क्लेम के तहत 9, कुटुंब न्यायालय से संबंधित 8, एनआइ एक्ट से संबंधित 19 वादों एवं राजस्व से संबंधित 974 वादों का निष्पादन किया गया. प्रधान जिला जज मो शाकिर ने सभी बेंचों का घूम-घूमकर जायजा लिया. उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से बकाया रुपये की रिकवरी का अच्छा माध्यम है. प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने बताया कि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देशानुसार प्रत्येक तीन माह के अंतराल में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है. इस मौके पर प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार सिंह, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष आनंद प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अक्षत श्रीवास्तव, डालसा के सचिव रवि चौधरी, प्रथम श्रेणी सिविल जज सीनियर डिविजन सह न्यायिक दंडाधिकारी एंजिलिना नीलम मड़की, रजिस्ट्रार सुप्रिया रानी तिग्गा, रेलवे दंडाधिकारी मंजीत साहू, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी पूजा पांडेय, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील सिंह तथा चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कृष्णा लोहरा, अंकित कुमार सिंह द्वारा मामलों का निष्पादन किया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
