मनोहरपुर स्टेशन से आरपीएफ, रेल चाइल्ड हेल्पलाइन व जन विकास केंद्र के संयुक्त प्रयास से मानव तस्करी के शिकार हो रही पांच नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया गया है. इन बच्चियों को दलाल के साथ नागपुर भेजा जा रहा था. सभी बच्चियों को घरेलू कार्य कराने के लिए ले जाया जा रहा था. सभी बच्चियों को शुक्रवार रात करीब 12 बजे मुक्त कराया गया. इन बच्चियों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है. ये बच्चियां मनोहरपुर प्रखंड के सेलाई, टोंटो प्रखंड के जेटेया, नोवामुंडी के बड़ाजामदा गुवा क्षेत्र के रहने वाली हैं. टीम की कार्य कुशलता से सभी बच्चियों को सुरक्षित बचाया गया, जबकि दलाल बचकर भाग निकला. संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी है. इन बच्चों को बाल कल्याण समिति चाईबासा को सुपुर्द कर दिया गया है. इस रेस्क्यू में चाइल्ड हेल्पलाइन से फणींद्र बड़ाइक, डीसीपीयू के आउटरिच वर्कर जगन्नाथ पोद्दार, रेलवे सुरक्षा बल के एसआई बीके सिंह, एएसआई रमैया हेम्ब्रम और हेड कांस्टेबल विश्वजीत बनर्जी, जन विकास केंद्र से सिस्टर बेनिडिकता एक्का शामिल थे.
पांचों बच्चियों को वात्सल्य योजना से जोड़ा जायेगा :
डॉ कृष्णा तिवारी ने बताया कि तस्करी बच्चों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, बीएनएस, 2023 के अनुच्छेद 143 और 144 मानव तस्करी तथा तस्करी किये गये बच्चों के यौन शोषण के लिए कठोर दंड का प्रावधान है. इसमें आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है. श्री तिवारी ने बताया कि इन बच्चों को बाल कल्याण समिति चाईबासा में सुपुर्द करा दिया गया है. अस्थाई समय तक बाल होम में रखते हुए परामर्शी द्वारा उनकी काउंसिलिंग करायी जायेगी. उन्होंने बताया की इन बच्चों को उनके घर में बाल कल्याण समिति द्वारा पुनर्वास कर मिशन वात्सल्य योजना से जोड़ा जायेगा. यहां उन्हें आर्थिक सहायता चार हजार रुपये प्रतिमाह मिलेगा. इससे वह परिवार में रहकर आगे की पढ़ाई कर सकेंगी.
सुदूरवर्ती क्षेत्र को टारगेट करते हैं तस्कर
दलाल सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र को अधिक टार्गेट करते हैं. बाल तस्करी स्वाभाविक रूप से गतिशील व छिपी हुई घटना है. इन दलालों को पहचानना मुश्किल है. दलाल इसी का फायदा उठाकर भोले-भाले आदिवासी क्षेत्र में ज्यादा पैर पसार रहे हैं. यहां दलाल��ं द्वारा अभिभावकों को बहला फुसलाकर उनके बच्चों को प्रति माह अच्छी सैलेरी दिलाने का झांसा देते हैं. फिर इन बच्चों को दिल्ली, मुंबई, नागपुर समेत कई शहरों में ले जाकर बेच दिया जाता है. दलाल इसमें बेहतर पैसे की उगाही करते हैं. जबकि ये बच्चे शोषण के शिकार हो जाते हैं.
परिजन की डांट से नाराज छात्र ने फांसी लगाकर दी जान
घाटशिला. घाटशिला के दाहीगोड़ा गांव में रवींद्र बानरा के पुत्र व जेसी हाई स्कूल के कक्षा छह के छात्र सुमित बानरा (13) ने शनिवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. छोटी बहन से पतंग को लेकर कहासुनी हुई थी. परिजनों के डाटने पर नाराज होकर उसने फांसी लगा ली.
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