झींकपानी: वर्ष 1946 में स्थापित चाईबासा सीमेंट वर्क्स (एसीसी सीमेंट प्लांट, झींकपानी) की बंदी पर प्रबंधन ने अंतिम मुहर लगा दी है. इसके साथ ही प्लांट को चालू रखने की उम्मीदें भी खत्म हो गयी हैं. करीब आठ दशक से झींकपानी और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र रहे इस कारखाने के बंद होने से स्थानीय रोजगार पर सीधा संकट खड़ा हो गया है. स्थायी मजदूरों के बाद अब बड़ी संख्या में ठेका मजदूर भी बेरोजगार हो गये हैं. इसका असर क्षेत्र के कारोबार पर भी दिखने लगा है.
पहले उत्पादन बंद, अब मजदूरों की इंट्री भी रोक दी
प्रबंधन ने 15 जून को नोटिस जारी कर 16 अगस्त से प्लांट बंद करने की घोषणा की थी. इससे पहले ही एक अप्रैल से सीमेंट उत्पादन बंद था. तीन मई से 15 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट को भी स्थायी रूप से बंद कर दिया गया. शैलो में सीमेंट स्टॉक रहने के कारण 11 मई तक डिस्पैच का काम चलता रहा. क्लोजर नोटिस के बाद 74 स्थायी मजदूरों में करीब आठ को एसीसी की दूसरी इकाई में स्थानांतरित किया गया, जबकि शेष मजदूरों से बीआरएस कराया गया. 15 अगस्त से इन मजदूरों को काम से बैठा दिया गया. करीब 1500 ठेका मजदूरों का सेटलमेंट लंबित होने के कारण उन्हें कुछ समय तक काम पर लिया जाता रहा. सेटलमेंट के बाद 10 सितंबर से उनकी प्लांट में इंट्री भी बंद कर दी गयी.
दशकों से गूंजने वाला पोंगा भी हुआ खामोश
10 सितंबर से प्लांट में ड्यूटी के लिए बजने वाला पोंगा (सायरन) भी बंद कर दिया गया. दशकों से झींकपानी की दिनचर्या का हिस्सा रहा यह सायरन अब लोगों को सुनाई नहीं देगा. फिलहाल बिजली, पानी और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए चुनिंदा मजदूरों को काम पर रखा जा रहा है. मजदूर सूत्रों के अनुसार इन्हें केवल काम के एवज में भुगतान मिलेगा. बोनस और पीएफ जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.
बेरोजगारी बढ़ी, पलायन की तैयारी, कारोबार पर भी असर
प्लांट की बंदी का सबसे बड़ा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ा है. प्रत्यक्ष रोजगार खत्म होने के साथ ही प्लांट पर निर्भर चाय-नाश्ते की दुकान, होटल, किराना, परिवहन और अन्य छोटे कारोबार भी प्रभावित होने लगे हैं. बेरोजगार हुए मजदूर अब दूसरे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने की तैयारी कर रहे हैं. इससे झींकपानी में पलायन बढ़ने की आशंका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने पुराने औद्योगिक संस्थान का बंद होना केवल मजदूरों की नौकरी खत्म होने का मामला नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाला है. कारखाना बंदी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के रवैये से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है.
