जैंतगढ़.
चंपुआ वन क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लगभग 70 हाथियों का झुंड लगातार उत्पात मचा रहा है. हाथी कभी चंपुआ शहर में घुस आते हैं तो कभी ग्रामीण इलाकों में फसलों और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. वन विभाग के अनुसार, चंपुआ रेंज के तहत पांच सेक्शन आते हैं, जिनमें करीब 40 ‘हाथी मित्र’ तैनात किए गए हैं. इनका कार्य हाथियों की निगरानी, ग्रामीणों को सतर्क करना और हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ना है. लेकिन वर्तमान में हाथी मित्र अपनी मांगों को लेकर राजधानी भुवनेश्वर में धरने पर बैठे हैं, जिससे फील्ड में उनकी अनुपस्थिति से हालात बिगड़ते जा रहे हैं.पिछले 24 घंटे में छह घर और फसलें क्षतिग्रस्त
बीते दिनों चंपुआ एनएसी क्षेत्र में दो हाथी घुस आए, वहीं बुधवार रात एक बड़ा झुंड खुंटापाड़ा पंचायत के सोलगोड़ा गांव में घुस आया. हाथियों ने सोलगोड़ा, मधुपुर, मालदा, बानरा और चापापिगिया गांवों में छह घरों और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया. हाथी मित्रों की अनुपस्थिति के चलते डीएफओ, रेंजर और अन्य अधिकारी खुद गांव-गांव जाकर हाथियों को खदेड़ने में जुटे हैं. बीती रात विभाग को सफलता मिली जब 30 हाथियों के एक झुंड को सोलगोड़ा से हतिनापुर जंगल की ओर खदेड़ा गया.वन विभाग पर बढ़ा दबाव
क्योंझर जिले में वर्तमान में 14 झुंडों में बंटे कुल 175 हाथी सात रेंज क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं. कर्मचारियों की भारी कमी के कारण वन विभाग सीमित संसाधनों और कुछ ग्रामीणों के सहयोग से हालात संभालने की कोशिश कर रहा है. वन विभाग के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक ओर हाथियों को नियंत्रित करना, दूसरी ओर प्रभावित लोगों को मुआवजा देना और नुकसान का आकलन करना है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
