फुसरो. माहेर संस्था की ओर से करगली के कल्याण मंडप में रविवार को धूमधाम से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व संस्था की ललिता किंडो ने किया. उद्घाटन मुख्य अतिथि सीसीएल बीएंडके एरिया जीएम चितरंजन कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी श्वेता सिंह, बेरमो थाना प्रभारी रोहित कुमार सिंह, चंद्रपुरा की पूर्व प्रमुख अनिता गुप्ता, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अर्चना सिंह, पूर्व वार्ड पार्षद रश्मि सिंह, रामचंद्र महतो, अनिल कुमार आदि ने किया. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक विषयों पर नाटक का मंचन किया गया. संथाली व नागपुरी गीतों पर नृत्य व कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये. अपने संबोधन में बीएंडके जीएम ने कहा कि अगर आपके अंदर आक्रोश है तो इसे सही दिशा दें. गलत दिशा चुना तो क्षति हो सकती है. महिलाएं स्वयं में सशक्त हैं व आने वाले समय में और सशक्त होंगी. सरकार द्वारा भी महिलाओं के उत्थान के लिए कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. महिलाओं का सम्मान सभी दिन होना चाहिए, जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है. श्वेता सिंह ने कहा कि महिलाएं सहनशक्ति का रूप होती हैं. इसका उदाहरण सुनीता विलियम्स के रूप में देखा जा सकता है. महिलाएं अपनी शक्तियों का उपयोग सकारात्मक कार्यों के लिए करें.
इन्होंने भी महिलाओं की महत्ता बतायी
थाना प्रभारी ने कहा कि एक महिला पूरे रिश्ते को संभालते हुए घर को स्वर्ग बनाने का काम करती हैं. अगर आप इस धरती रूपी संसार के स्वर्ग में रहना चाहते हैं तो अपने घर की महिलाओं को सम्मान दें. आज की महिलाएं पुरुषों से केवल सम्मान की मांग करती हैं. पूर्व वार्ड पार्षद ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुष से कंधा से कंधा मिला कर चल रही हैं. पत्रकार राकेश वर्मा ने कहा कि आज भारत में शीर्ष पदों पर महिलाओं का औसत पूरे विश्व से ज्यादा है. वर्ष 2004 में यह 11.4 फीसदी था और वर्ष 2025 में 36.5 हो गया. जबकि पूरे विश्व में 34 फीसदी महिलाएं कंपनियों के बड़े पदों पर हैं. धन्यवाद ज्ञापन संस्था के एरिया सुपरवाइजर रमेश कुमार मरांडी ने किया. मौके पर सीसीएल बीएंडके के कार्मिक प्रबंधक पीएन सिंह, अर्चना सिंह, चिकु सिंह, सुषमा कुमारी,पम्मी सिंह, गुड़िया प्रवीन, सोनी खातून, संस्था के सोनी शर्मा, संगीता टुडू, निशा सिंह, श्वेता कुमारी, सरीता देवी, मनीषा देवी, सोनम, तैशबा खातून, शीतल देवी, सावित्री देवी, द्रोपदी देवी, कांती देवी, आरती देवी, पनवा देवी, गेंदिया देवी, तुलसी देवी सहित कई महिलाएं मौजूद थीं.
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