भारतीय नौ सेना में शामिल स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती का क्या है झारखंड कनेक्शन, पढ़िए ये रिपोर्ट

बोकारो (सुनील तिवारी) : समंदर की लहरों पर राज करना है, तो समंदर की गहराई का अंदाजा होना जरूरी है. अगर दुश्मनों को काबू में रखना है, तो समंदर की तरह अथाह ताकत का अंदाजा होना भी जरूरी है. इसलिए भारत का स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती, जिसे समंदर का बाहुबली भी कह सकते हैं, भारतीय नौसेना में (22 अक्तूबर को) शामिल हो गया है. झारखंड सहित बोकारो के लिये यह गौरव की बात है कि स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती में बोकारो स्टील प्लांट के इस्पात का उपयोग किया गया है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 28, 2020 10:03 AM

बोकारो (सुनील तिवारी) : समंदर की लहरों पर राज करना है, तो समंदर की गहराई का अंदाजा होना जरूरी है. अगर दुश्मनों को काबू में रखना है, तो समंदर की तरह अथाह ताकत का अंदाजा होना भी जरूरी है. इसलिए भारत का स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती, जिसे समंदर का बाहुबली भी कह सकते हैं, भारतीय नौसेना में (22 अक्तूबर को) शामिल हो गया है. झारखंड सहित बोकारो के लिये यह गौरव की बात है कि स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती में बोकारो स्टील प्लांट के इस्पात का उपयोग किया गया है.

झारखंड के बोकारो जिले का बोकारो इस्पात संयंत्र पूरे प्रदेश के लोगों के लिए गौरव है. इस स्‍टील प्‍लांट को फिर एक गौरवशाली मुकाम हासिल हुआ, जब 22 अक्टूबर को देश में बनी कमोर्टा क्लास की चार पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू) में से आखिरी आईएनएस कवरत्ती को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया. इस युद्धपोत में बोकारो स्टील प्लांट का लगभग 1000 टन डीएमआर प्लेट लगा है, जबकि भिलाई का 4700 टन व राउरकेला का 865 टन.

इससे पूर्व भी बीएसएल ने युद्धपोत निर्माण के लिए डीएमआर प्लेटों की आपूर्ति की है. इस तरह बोकारो स्टील प्लांट को आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. बोकारो स्टील प्लांट सहित संपूर्ण सेल बिरादरी के लिए यह गर्व का विषय है. चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच भारत अपनी सैन्य क्षमता में इजाफा करने में लगा हुआ है. इसी कड़ी में स्वदेशी निर्मित एंटी-सबमरीन युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती को नौसेना में शामिल किया हैं.

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आईएनएस कवरत्ती की खासियत है कि यह रडार की पकड़ में नहीं आता. कवरत्ती के बेड़े में शामिल होने से नौसेना की ताकत में और भी अधिक इजाफा होगा. प्रोजेक्ट-28 के तहत निर्मित चार स्वदेशी युद्धपोत में से यह अंतिम है. आईएनएस करवत्ती को भारतीय नौसेना के संगठन डायरेक्टॉरेट ऑफ नेवल डीजाइन (डीएनडी) ने डिजाइन किया है. इससे पहले तीन युद्धपोत आईएनएस कमोर्ता, आईएनएस कदमत व आईएनएस किलतान सौंपे जा चुके हैं.

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आईएनएस कवरत्ती का कमीशन देश के समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. कवरत्ती को स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस किया गया है, जिसमें एक मध्यम श्रेणी की बंदूक, टारपीडो ट्यूब लांचर, रॉकेट लांचर और एक करीबी हथियार प्रणाली शामिल है. इसमें अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है. ऐसे सेंसर लगे हैं, जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम हैं. इसमें 90 फीसद चीजें स्वदेशी हैं.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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