कसमार प्रखंड के चंडीपुर गांव से मधुकरपुर के उत्क्रमित उच्च विद्यालय की दूरी भले ही महज 500 फीट हो, पर यह छोटी दूरी भी चंडीपुर के करीब 250 विद्यार्थियों के लिए एडवेंचर बन गयी है. स्कूल जाने वाले बच्चों को बारिश में कीचड़ और फिसलन भरे इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो गया है. उन्हें मुख्य मार्ग से करीब तीन से चार किलोमीटर घूमकर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. यह उनके लिए रोज की बड़ी चुनौती है. दोनों गांवों के बीच वर्षों से मौजूद पगडंडी अब तक पक्की सड़क नहीं बनी है.
बरसात में सबसे ज्यादा होती है परेशानी
सामान्य दिनों में विद्यार्थी किसी तरह पगडंडी से होकर स्कूल पहुंच जाते हैं, पर बारिश होते ही स्थिति बदल जाती है. कीचड़ के कारण रास्ते पर फिसलन बढ़ जाती है. छोटे-छोटे बच्चों के लिए साइकिल से चलना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार कपड़े और जूते खराब होने के डर से भी बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है. मजबूरी में इन बच्चों को लंबे रास्ते का रुख करना पड़ता है.
सिर्फ 500 मीटर का पक्कीकरण अधूरा
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का समाधान बेहद छोटा है, लेकिन वर्षों से लंबित है. करीब 500 फीट संपर्क पथ को पक्का कर दिया जाए तो विद्यार्थियों को लंबी दूरी से राहत मिल जायेगी. इसके साथ ही चंडीपुर-मधुकरपुर के बीच सीधा आवागमन भी बहाल हो जायेगा.
गांवों के बीच सालों से अधूरा है संपर्क
संपर्क पथ का पक्कीकरण हो गया तो यह सड़क केवल विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी नहीं होगी, बल्कि मधुकरपुर के लोगों को चंडीपुर होते हुए पेटरवार की ओर जाने में भी सहूलियत होगी. फिलहाल सीधा रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दूसरे मार्ग से होकर जाना पड़ता है. ऐसे में 500 फीट का यह मार्ग दोनों गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क बन सकता है.
रैयती जमीन बनी सबसे बड़ी अड़चन
स्थानीय लोगों के अनुसार पगडंडी रैयती जमीन से होकर गुजरती है. इसी वजह से सड़क निर्माण का मामला लंबे समय से अटका है. स्थानीय शिक्षक व समाजसेवी अनूप कुमार पांडेय ने बताया कि ग्रामीण जमीन के मुआवजे के लिए अपने स्तर से सहयोग करने को भी तैयार हैं. ग्रामीणों के अनुसार वे आपस में राशि जुटाकर भी समाधान में योगदान देना चाहते हैं, पर प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि स्तर पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है.
ग्रामीण उठाते रहे हैं सड़क निर्माण की मांग
समाजसेवी संजय कुमार स्वर्णकार, धनंजय स्वर्णकार समेत अन्य ग्रामीणों ने भी सड़क निर्माण की मांग उठायी है. उनका कहना है कि समस्या बड़ी नहीं है, जरूरत केवल पहल और इच्छाशक्ति की है. पंसस इंद्रजीत पांडेय ने भी मार्ग को अहम बताते हुए कहा कि सड़क निर्माण के लिए उन्होंने अपने स्तर से प्रयास किया है. आगे भी पहल जारी रखने की बात कही.
