तीन साल बाद आया बोकारो के विष्णु शर्मा हत्याकांड का फैसला, दो दोषियों को उम्र कैद की सजा

Bokaro News: बोकारो के चर्चित विष्णु शर्मा हत्याकांड में तीन साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया. एडीजे प्रथम की अदालत ने सनोज सिंह और अजीत सिंह को उम्रकैद की सजा दी. दोनों दोषियों को साक्ष्य मिटाने और आर्म्स एक्ट मामले में अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

बोकारो से रंजीत कुमार की रिपोर्ट

Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले में चर्चित विष्णु शर्मा हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. एडीजे प्रथम दीपक बरनवाल की अदालत ने मुख्य आरोपी सनोज सिंह और उसके सहयोगी अजीत सिंह को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया. फैसले के बाद मृतक के परिजनों ने राहत की सांस ली और न्यायपालिका पर भरोसा जताया.

19 मई 2023 को हुई थी हत्या

यह मामला चास थाना क्षेत्र के शिवपुरी कॉलोनी का है. अपर लोक अभियोजक सर्वेश आनंद सिंह ने बताया कि 19 मई 2023 को फुदनीडीह निवासी विष्णु शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी सनोज सिंह और अजीत सिंह ने विष्णु शर्मा को शाम करीब छह बजे अपने घर बुलाया था. आरोप है कि पहले से रची गई साजिश के तहत दोनों ने विष्णु शर्मा पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

सुनियोजित तरीके से की गई थी वारदात

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या माना था. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले विष्णु शर्मा को बुलाया और फिर योजनाबद्ध तरीके से उस पर हमला किया. घटना के बाद इलाके में भय और तनाव का माहौल बन गया था. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए, जिसके आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया.

अदालत में पेश किए गए 13 गवाह

करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाह पेश किए. गवाहों के बयान, पुलिस जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया. अपर लोक अभियोजक सर्वेश आनंद सिंह ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान को महत्वपूर्ण मानते हुए सनोज सिंह और अजीत सिंह को हत्या का दोषी करार दिया.

उम्रकैद के साथ अतिरिक्त सजा भी

अदालत ने हत्या के मामले में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के आरोप में सात वर्ष की अतिरिक्त सजा दी गई. वहीं आर्म्स एक्ट के तहत भी दोनों दोषियों को सात-सात वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

परिजनों ने जताया न्यायपालिका पर भरोसा

करीब तीन वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद फैसला आने पर मृतक विष्णु शर्मा के परिजनों ने अदालत के प्रति आभार जताया. परिजनों ने कहा कि उन्हें कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आखिरकार उन्हें इंसाफ मिला. परिवार के लोगों ने कहा कि लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद अदालत का फैसला उनके लिए राहत लेकर आया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से अपराधियों में कानून का भय बढ़ेगा.

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इलाके में फैसले की चर्चा

विष्णु शर्मा हत्याकांड बोकारो के चर्चित मामलों में शामिल रहा है. ऐसे में अदालत का फैसला आने के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैसले से यह संदेश गया है कि अपराध करने वालों को देर से ही सही, लेकिन सजा जरूर मिलती है. कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जो फैसला सुनाया है, वह न्यायिक प्रक्रिया में लोगों के विश्वास को मजबूत करता है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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