Bokaro News : पारसाडीह में पक्की सड़क नहीं, बरसात में कैद हो जाते हैं लोग

Bokaro News : जरीडीह प्रखंड अंतर्गत बारु पंचायत के पारसाडीह गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं बन पायी है.

बरसात में आवागमन में होती है परेशानी, साइकिल व बाइक सवार गिर कर हो जाते हैं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को अस्पताल में जाने में होती है परेशानी

विप्लव सिंह, जैनामोड़, जरीडीह प्रखंड अंतर्गत बारु पंचायत के पारसाडीह गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं बन पायी है. कल्याणपुर आरइओ सड़क से परसाडीह तक लगभग 1.5 किमी लंबी सड़क कच्ची है. पारसाडीह गांव की आबादी लगभग 600 है. कच्ची सड़क पर गड्ढे भी बन गये हैं, जिस पर आवागमन करना खतरनाक रहता है. साइकिल और बाइक वाले लोग आये दिन गिरते हैं. बरसात में गांव के लोगों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है. भारी कीचड़ के कारण एक तरह से वे अपने गांव-घर में ही कैद होकर रह जाते हैं.

हालांकि चुनाव दर चुनाव वोट लेने के लिए यहां पहुंचने वाले नेता हर बार ग्रामीणों की मांग पर पक्की सड़क बनवाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसी ने भी यहां पर पक्की सड़क निर्माण की कोई कोशिश नहीं की. गांव के बाबूश्वर सोरेन, नरेश किस्कू, निर्मल सोरेन, चुनू मांझी, सिकंदर सोरेन, डीसी किस्कू का कहना है कि जनप्रतिनिधि सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए ही उनके गांव में आते हैं. उनके पास उन्हें देने के लिए सिवाय झूठे आश्वासनों के अलावा और कुछ नहीं है. ग्रामीण बताते हैं कि कच्ची सड़के के कारण बीमारों को अस्पताल पहुंचाना तक मुश्किल हो जाता है. कीचड़ होने पर यहां एंबुलेंस तक प्रवेश नहीं कर पाती. मरीज को खाट पर अस्पताल पहुंचाते हैं.

झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान आये थे शिबू सोरेन

85 वर्षीय वीरू मांझी ने बताया कि इस गांव में दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड राज्य अलग आंदोलन के समय आये थे. ग्रामीणों के साथ बैठक कर रणनीति बनायी थी. उम्मीद थी कि राज्य अलग होने के बाद क्षेत्र का विकास होगा. इसके गांव के लोगों ने आंदोलन में हिस्सा भी लिया था.

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