Bokaro News : बेरमो में हैं कई प्रसिद्ध शिवालय, इनसे जुड़ी है लोगों की आस्था

Bokaro News : बेरमो में कई प्राचीन शिवालय हैं, जिनके प्रति श्रद्धालुओं में आस्था है. महाशिवरात्रि को लेकर बेरमो कोयलांचल में भी जोर-शोर से तैयारी चल रही है.

राकेश वर्मा, बेरमो : महाशिवरात्रि को लेकर बेरमो कोयलांचल में भी जोर-शोर से तैयारी चल रही है. शिवालयों में विशेष तैयारी की गयी है. कई जगह भजन-कीर्तन समेत अन्य अनुष्ठान किये जा रहे हैं. बेरमो, चंद्रपुरा, नावाडीह व गोमिया प्रखंड के शिवालयों में सफाई व रंगरोगन के बाद सजावट की जा रही है. कई शिवालयों से शिव बारात निकाली जायेगी. बेरमो में कई प्राचीन शिवालय हैं, जिनके प्रति श्रद्धालुओं में आस्था है.

200 साल पुराना है गोमिया मोड़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर :

गोमिया मोड़ में भीखा अहरा तालाब के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है. यहां हर सोमवार को पूजा के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पुजारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 200 साल पहले किया गया था. बाद में मंदिर का सौदर्यीकरण कराया गया. श्रावण मास और शिवरात्रि पर यहां से शिव बारात की झांकी निकाली जाती है. इस वर्ष भी गुरुवार के मंदिर परिसर से भव्य शिव बारात निकाली जायेगी. नागेश्वरनाथ पंच मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भीड़ कुरपनिया स्थित बाबा नागेश्वरनाथ पंच मंदिर में महाशिवरात्री पर भक्तों की भारी भीड़ होती है. भव्य शिव बारात भी निकाली जाती है. इस मंदिर की स्थापना 24 मार्च 1986 को हुई थी. इसमें श्रमिक नेता रामाधार सिंह समेत अन्य लोगों व सीसीएल अधिकारियों ने अहम योगदान दिया था. जरीडीह बाजार के दामोदर नदी के तट पर स्थित दामोदर नाथ मंदिर भी दशकों पुराना है. लोगों का कहना है कि इस मंदिर की स्थापना आजादी के पूर्व हुई थी. बाद में जीर्णोद्धार किया गया. शिवरात्री में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा के लिए आते हैं. गांधीनगर बारीग्राम स्थित बटेश्वरनाथ मंदिर में भी महाशिवरात्री पर भीड़ उमड़ेगी.

महाभारत काल से जुड़ा है झारखंडधाम का इतिहास :

प्रसिद्ध तीर्थ स्थल झारखंडधाम में महाशिवरात्री की तैयारी पूरी कर ली गयी है. इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से ही जुड़ा है. बताया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव झारखंडीनाथ के जंगल में छिपे हुए थे.

चंद्रपुरा का सबसे पुराना शिवालय है चंदेश्वरनाथ शिव मंदिर

: चंदेश्वरनाथ शिव मंदिर चंद्रपुरा क्षेत्र का सबसे पुराना शिवालय है. वर्ष 1962 में इसका निर्माण डीवीसी में नौकरी करने आये और कॉलोनी में रह रहे लोगों ने कराया था. आसपास के ग्रामीणों ने भी मदद की थी. भूरसाबाद के सोमर मांझी व सुकू मांझी ने इस मंदिर के निर्माण के लिए अपनी जमीन दान में दी थी. समय के साथ मंदिर का सौदर्यीकरण भी हुआ. मंदिर की फूलवारी में विभिन्न फूलों के पौधे लगाये गये हैं.

टीटीपीएस ललपनिया में है नागेश्वर महादेव मंदिर :

टीटीपीएस ललपनिया स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर में आकर्षक विद्युत सज्जा की गयी है. होसिर जाने वाले जीरो प्वाइंट के समीप लुगू मंदिर में भी शिवरात्रि को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है. इधर, बड़कीपुन्नू, खंखडा, महुआटांड़, कंडेर, धवैया, तिलैया के शिवालयों में भी मंदिर समिति द्वारा आकर्षक सजावट की गयी है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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