साठ के दशक में बने चंद्रपुरा थर्मल के पुराने प्लांट के डिस्मेंटलिंग होने व 15 साल पहले बने नये प्लांट की समय सीमा आने वाले वर्शों में समाप्त होने की स्थिति में चंद्रपुरा में नये प्लांट की जरूरत थी जो आने वाले वर्षों में पूरा हो जायेगा. यह प्लांट यहां डीवीसी व कोल इंडिया के ज्वाइंट वेंचर में बनना है जिसे लेकर दोनों के बीच एमओयू हो चुका है. 800 मेगवाट के दो यूनिटों (कुल उत्पादन 1600 मेगावाट) वाले इस सुपर क्रिटिकल प्लांट ना सिर्फ देश को बिजली उपलब्ध करायेगा. बल्कि इससे चंद्रपुरा का भविष्य भी बेहतर होगा. इस प्लांट के बनने से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हजारों की संख्या में लोगों को रोजगाार मिलेगा. उक्त प्लांट की लागत 21 हजार करोड़ रुपये है. बता दें कि चंद्रपुरा में नया प्लांट बनाने की मांग कई वर्षों से की जा रही थी.
डी टाइप में चिन्हित है प्लांट के लिए जमीन
नया प्लांट बनाने के लिये डीवीसी ने आवासीय कॉलोनी के पूर्वी क्षेत्र डी टाईप को चुना है. इस जगह का कई बार सर्वे भी हो चुका है. इस एरिया में लगभग 400 क्वार्टर व कई आवासीय भवन है जिसे ध्वस्त करने के लिये डीवीसी की ओर से टेंडर हो चुका है. प्रथम चरण में किये गये टेंडर को मुंबई की एक कंपनी ने लिया है जिसने भूमि पूजन व कार्य का शिलान्यास भी कर दिया है. दूसरे चरण में कई एरिया में डीवीसी आवासीय कॉलोनी के लगभग 2500 क्वार्टरों को तोड़ने को लेकर भी टेंडर निकल चुका है.
प्लांट निर्माण में चाहिये सभी का सहयोग: एचओपी
डीवीसी चंद्रपुरा थर्मल के वरीय महाप्रबंधक सह परियोजना प्रधान राम कुमार अनुभवी ने बताया कि प्लांट के लिये सभी को सहयोग करना चाहिये ताकि प्लांट निर्माण से चंद्रपुरा का भविष्य बढ़े और स्थानीय व विस्थापित लोगों को रोजगार मिले. प्लांट निर्माण के संबंध में बताया कि सीटीपीएस की एग्जिस्टिंग जमीन में ही प्लांट लगाने की परिकल्पना तैयार की गयी है. इसलिए आवासीय कॉलोनी को हटाया जाना है. उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा में नया प्लांट आने से आसपास के क्षेत्रें का विकास होगा ओर चंद्रपुरा अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सकेगा.
