गांधीनगर. बरवाबेड़ा, लोधबेड़ा, कुरपनिया बस्ती के विस्थापितों ने विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले बुधवार की शाम को मशाल जुलूस निकाल कर सीसीएल बीएंडके एरिया के खासमहल कोनार परियोजना पिट ऑफिस के समक्ष प्रदर्शन किया. प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और नारेबाजी की. समिति के संरक्षक गुलाम जिलानी ने कहा कि प्रबंधन को विस्थापित से संबंधित 23 सूत्री मांग पत्र दिया गया था. 15 फरवरी को वार्ता हुई और प्रबंधन ने उत्पादन माह होने के बात कह कर आंदोलन स्थापित करने की बात कहते हुए मांगों पर सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया था. लेकिन दो माह बाद भी प्रबंधन द्वारा ठोस पहल नहीं की गयी है.
चक्का जाम आज से
बुधवार को पुन: प्रबंधन ने वार्ता के लिए बुलाया. लेकिन संतोषजनक वार्ता नहीं हुई और विस्थापितों ने वार्ता का बहिष्कार कर दिया. आंदोलन की घोषणा की गयी है. इसके तहत 10 अप्रैल से परियोजना का चक्का जाम किया जायेगा. कहा कि हम लोगों के गांव माइंस से सटे हुए हैं. यहां प्रदूषण की समस्या सबसे गंभीर है. गांव जाने के लिए सड़क नहीं है. आउटसोर्सिंग कंपनियां ट्रांसपोर्टिंग में नियमों का उल्लंघन कर रही है. ब्लास्टिंग के कारण कई घर जर्जर हो गये हैं, उनकी मरम्मत समुचित ढंग से नहीं की जा रही है. गांव के बच्चों के लिए स्कूल बस की व्यवस्था नहीं है. लोकल सेल में भी उचित भागीदारी नहीं दी जा रही है. इधर, आंदोलन को समर्थन दे रहे जेएलकेएम के केंद्रीय सचिव रोशन महतो ने कहा कि प्रबंधन विस्थापितों को दबा रही है. संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने पर केस कर दिया जाता है. अब विस्थापित डरने वाले नहीं है. आर-पार की लड़ाई होगी. मौके पर राजाउल मुस्तफा, इजहार अहमद, मो जफर, इसरार अहमद, जफर अली, नजीर, ढुलू ,गणेश महतो, साबिर, अबू तालीम, इनाम, महबूब, नूरानी, गुलाम गौस, रमेश महतो, पिंटू तिवारी, साजिद, राजा, नजीर, सफीरूद्दीन, ढुल्लू महतो, अबू तालीम, साबिर, हसन रजा, जबार, समीम, हसनैन, शाहरुख सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे.
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