Bokaro News : बेरमो में दिशोम गुरु के नेतृत्व में हुए थे कई आंदोलन

Bokaro News : बेरमो में दिशोम गुरु के नेतृत्व में कई आंदोलन हुए थे.

By JANAK SINGH CHOUDHARY | January 10, 2026 11:02 PM

वर्ष 1974 से 1980 के बीच बिनोद बिहारी महतो के साथ मिल कर दिशोम शिबू सोरेन ग्रामीण क्षेत्रों में जोर-शोर से आंदोलन चलाते रहे. टुंडी क्षेत्र के जंगल में रह कर पोखरिया में आश्रम बनाया. इसी आश्रम से आदिवासियों को संगठित कर दिकू भगाओ आंदोलन चलाया. बिनोद बिहारी महतो के साथ अक्सर शिबू सोरेन बेरमो, गोमिया, नावाडीह, जरीडीह, पेटरवार, कसमार के इलाके में आते थे. नावाडीह प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित ऊपरघाट के गांवों में महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन चलाया था. इस दौरान धनकटनी आंदोलन भी चला था. आंदोलन के क्रम में ही एक महाजन की हत्या हुई थी. इसमें शिबू सोरेन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था. बोकारो जिला के अराजू, बेलडीह भस्की में भी उनके नेतृत्व में धनकटनी आंदोलन चला था. शिबू सोरेन आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने को लेकर गांव-गांव में बैठक करते थे. केंद्रीय कोयला मंत्री बनने के बाद बेरमो क्षेत्र में कोयला मजदूरों की समस्याओं को लेकर गंभीर रहे. झामुमो के केंद्रीय सदस्य व विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने बताया कि शिबू सोरेन अक्सर जैनामोड़ पुरानी जीप या बाइक से आते थे. करहरिया के राजबली मियां से उनकी गहरी दोस्ती थी. जैनामोड़ आने पर उन्हें जरूर बुलाते और दोनों के बीच घंटों हंसी मजाक चलता था.

ललपनिया क्षेत्र में वर्ष 1970-80 के बीच शिबू सोरेन के नेतृत्व में महाजनी प्रथा के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन हुआ था. झामुमो के पूर्व नेता धनीराम मांझी ने बताया कि फुटकाडीह बाजारटांड़ के समीप जारागढा के बीच आंदोलन हुआ था. इसमें पुलिस की गोली से पेरो मंझियाइन की मौत हो गयी थी. झारखंड आंदोलन के समय भी इस क्षेत्र में शिबू सोरेन आते रहते थे. जब कोरोना काल में शिबू सोरेन कोरोना संक्रमित हुए थे तो गांव में उनकी कुशलता के लिए जाहेर स्थान में मन्नतें मांगी गयी थी.

टीटीपीएस के निर्माण काल में तीन महीने तक चला था आंदोलन

ललपनिया में टीटीपीएस के निर्माण काल में चार आदिवासी गांवों के विस्थापन की बात सामने आयी थी तो उनके हक के लिए लड़ाई शिबू सोरेन ने शुरू की थी. वर्ष 1987-88 में स्थानीय बाबूचंद बास्के (प्रिय मित्र) व जनबल के साथ तीन महीने तक जबरदस्त आंदोलन चलाया था. बाद में पांच विस्थापितों के नियोजन व मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गयी.

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