विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: तनाव और निराशा को मन में न रखें, समय पर मदद लेने की अपील

मानसिक उलझनों और तनाव को समय पर अपनों से साझा करना आत्महत्या के जोखिम को कम कर सकता है. विशेषज्ञों की मानें तो खुलकर बात करने से मानसिक बोझ हल्का होता है और समाधान का रास्ता खुलता है.

बोकारो. मानसिक उलझनों और परेशानियों को समय रहते परिवार, दोस्तों या चिकित्सक के साथ साझा करने से आत्महत्या का खतरा कम किया जा सकता है. सुख-दु:ख और जीवन की कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे से खुलकर बात करना जरूरी है. समस्या साझा करने से मानसिक बोझ कम होता है और समाधान का रास्ता निकल सकता है. यह कहना है चास स्थित मुस्कान हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. इरफान अंसारी का. वह गुरुवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर अस्पताल में आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.

गोष्ठी का उद्घाटन अस्पताल अधीक्षक डॉ. इरफान अंसारी, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. शाहनवाज अनवर और डॉ. एससी मुंशी ने संयुक्त रूप से किया. चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और परेशानी के समय व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ने की जरूरत पर जोर दिया.

अवसाद के संकेतों को समझना जरूरी

डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि अवसाद की स्थिति में व्यक्ति के व्यवहार और दैनिक गतिविधियों में बदलाव दिखाई दे सकता है. वह लगातार उदास रह सकता है, दोस्तों और परिजनों से दूरी बनाने लगता है तथा पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम हो सकती है. ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें गंभीरता से समझने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने की आवश्यकता है.

परेशानी होने पर खुलकर बात करने की सलाह

डॉ. शाहनवाज अनवर और डॉ. एससी मुंशी ने आत्महत्या रोकथाम के उपायों पर चर्चा की. उन्होंने खासकर युवाओं से अपील की कि किसी तरह की मानसिक परेशानी, तनाव या निराशा महसूस होने पर उसे अपने तक सीमित न रखें. परिवार, भरोसेमंद मित्र या चिकित्सक से बात करने से समय पर सहायता मिल सकती है.

चिकित्सकों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर झिझक या सामाजिक दबाव के कारण कई लोग मदद लेने से बचते हैं. ऐसे में परिवार और आसपास के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. व्यवहार में अचानक बदलाव या लगातार अलग-थलग रहने जैसे संकेत दिखने पर संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना और जरूरत के अनुसार पेशेवर मदद तक पहुंचाना जरूरी है.

गोष्ठी में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा संकट की स्थिति में समय पर सहायता लेने का संदेश दिया. इस दौरान अस्पताल के चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य कर्मचारी मौजूद थे.

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By Ranjeet kumar

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