झारखंड-बंगाल सीमा पर स्थित सेवाती घाटी इन दिनों एक अजीबोगरीब मामले को लेकर चर्चा में है. कुछ सप्ताह पहले बोकारो जिला प्रशासन की ओर से घाटी के रास्ते में जगह-जगह पर सावधान, आगे गहरा पानी है, आगे न जाएं, अंदर अचानक से गहरा पानी हो सकता है जैसे चेतावनी बोर्ड लगाये गये थे. पूरे मार्ग में एक दर्जन से अधिक ऐसे बोर्ड लगाये गये थे. लेकिन, ग्रामीणों का कहना है कि सेवाती घाटी की वास्तविक भौगोलिक स्थिति इन चेतावनियों से मेल नहीं खाती.
झरने का पानी बहकर जाता है बंगाल
घाटी में एक प्राकृतिक झरना है. बारिश के दिनों में झरने में पानी का बहाव जरूर तेज हो जाता है, लेकिन पानी कहीं जमा होकर गहरे जलाशय का रूप नहीं लेता. झरने का पानी घाटी की सड़क पर झरने के सामने निर्मित पुलिया के नीचे से होकर आगे बंगाल के गांवों की ओर बह जाता है. ऐसे में ‘आगे गहरा पानी’ जैसे बोर्ड देखकर यहां से गुजरने वाले लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही थी.
गहरे पानी की जगह तीखे मोड़ की चेतावनी जरूरी
ग्रामीणों के अनुसार जिला प्रशासन को यदि सुरक्षा के उद्देश्य से बोर्ड लगाना था, तो घाटी की वास्तविक स्थिति और यहां मौजूद संभावित खतरों के अनुरूप चेतावनी बोर्ड लगाये जाने चाहिये थे. ग्रामीणों का कहना है कि यहां ‘आगे गहरा पानी है’ जैसे भ्रामक बोर्ड लगाने के बजाय ‘आगे तीखा मोड़ है’, ‘मार्ग संकीर्ण है, वाहन धीरे चलाएं’, ‘तीखी चढ़ाई/ढलान से सावधान’, ‘झरने के पास फिसलन हो सकती है’ और ‘बरसात में पानी का बहाव तेज हो सकता है’ जैसे सुरक्षा संकेतक लगाये जाने चाहिये. इससे राहगीरों को वास्तविक खतरे की जानकारी मिलेगी और सेवाती घाटी की परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा संदेश भी मिलेगा.
दो-तीन सप्ताह बाद अधिकांश बोर्ड गायब
दिलचस्प बात यह है कि करीब दो-तीन सप्ताह तक ये बोर्ड अपनी जगह सुरक्षित रहे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में दो-तीन बोर्ड को छोड़कर लगभग सभी गायब हो गये. ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व बोर्ड उखाड़कर ले गये हैं. इससे अब गलत जगह लगाये गये बोर्ड और उनके गायब होने, दोनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
प्राकृतिक पहचान है सेवाती घाटी
स्थानीय मुखिया सरिता देवी ने भी बोर्डों के गायब होने पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि सेवाती घाटी क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक पहचान है. यहां सुरक्षा के लिए बोर्ड लगाये जाएं तो वे लोगों को भ्रमित करने के बजाय स्थल की वास्तविक परिस्थितियों और संभावित जोखिमों की स्पष्ट जानकारी देने वाले होने चाहिये.
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान झरने का पानी और फिसलन वास्तविक खतरा हो सकता है. इसलिए प्रशासन को स्थल का निरीक्षण कर उचित स्थानों पर सही संदेश वाले सुरक्षा बोर्ड लगाने चाहिये, ताकि घाटी में आने वाले पर्यटकों और राहगीरों को सुरक्षा के साथ सही जानकारी भी मिल सके.
