Bokaro News : सामाजिक स्तर पर करें छोटी-छोटी बातों का निपटारा

Bokaro News : प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसिलिंग में अधिवक्ता नीतू जायसवाल ने कई पाठकों को सलाह दी.

आपसी समझ से काम नहीं लेने के कारण आज छोटे-छोटे मामले भी कोर्ट पहुंच रहे हैं. ऐसे में कोर्ट पर अतिरिक्त भार बढ़ रहा है. छोटी-छोटी बातों पर केस होने पर दोनों पक्ष को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक हानि होती है. कोर्ट या थाना में जाने से पहले परिवार या सामाजिक स्तर पर मामले को सलटाने का प्रयास होना चाहिए. रिश्ते बचाने के लिए कुछ मामलों को नजरअंदाज भी करना चाहिए. मामला संगीन होने पर निश्चित रूप से कोर्ट की शरण लें. कोर्ट में मामले कई वर्षों तक चल सकते हैं. इसका ध्यान भी रखें. न्यायालय आपकी सहायता के लिए है. यह बातें रविवार को प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसिलिंग में बोकारो सिविल कोर्ट की वरीय अधिवक्ता नीतू जायसवाल ने कही.

पाठकों के सवालों पर सलाह

धनबाद के सुनील शर्मा का सवाल : परिवार में जमीन का बंटवारा करना चाहता हूं. यह कागजी सही होगा या आपसी सलाह से हो जायेगा.

अधिवक्ता की सलाह : आपसी सलाह के बाद भी कोर्ट से कागजात जरूर बनवाये. कागजी कार्रवाई भविष्य के लिए जरूरी है. आने वाली पीढ़ी को भी समस्याओं से बचाव होगा.

कोडरमा के परमजीत चौबे का सवाल : जमीन के मामले में एसडीएम कोर्ट से मेरे पक्ष में फैसला आया. अब विरोधी पक्ष के लोग दोबारा मामला कोर्ट में ले जा रहे हैं. ऐसे में मेरे लिए क्या सही होगा.

अधिवक्ता की सलाह : कोई भी व्यक्ति न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र है. आप पुन: कागजात को प्रस्तुत करें. सबकुछ सही है, तो जीत आपकी होगी. परेशान होने की जरूरत नहीं है.

कतरास के संजय प्रकाश का सवाल : एक व्यक्ति को एक लाख रुपया उधार दिया था. उसने पैसा चेक के माध्यम से वापस किया. चेक बैंक में बाउंस हो गया. अब क्या कर सकता हूं.

अधिवक्ता की सलाह : पहले आपसी समन्वय बना कर हल निकालने का प्रयास करे. ऐसा नहीं होने पर न्यायालय की शरण में जाये. आपका पैसा निश्चित रूप से आपको मिलेगा.

गिरिडीह के संजय कुमार का सवाल : सरकारी कर्मचारी पर मैंने केस किया है. 15 माह में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है. सभी वरीय पुलिस अधिकारी के पास शिकायत की गयी है. अब क्या हो सकता है.

अधिवक्ता की सलाह : कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में न्यायालय का सहारा लें. न्यायालय को पूरी बातों की जानकारी साक्ष्य के साथ उपलब्ध करायें. हर हाल में पुलिस अधिकारी को कार्रवाई करनी होगी.

बोकारो के प्रकाश बाउरी का सवाल : मेरे पिता ने दो शादी है. मैं पहली पत्नी का पुत्र हूं. मेरे पिता ने अपनी संपत्ति बेच दी है. अब मेरे नाम की जमीन को बेचकर मुझे बेघर करना चाहते है. क्या करे.

अधिवक्ता की सलाह : पिता द्वारा बेची हुई जमीन दादा जी के नाम की है, तो बिक्री रद्द हो जायेगी. साथ ही आपके पैसे से खरीदी आपकी जमीन कोई दूसरा नहीं बेच सकता है. जमीन के कागजात के साथ न्यायालय का सहारा लें.

धनबाद के ब्रजेश कपरदार का सवाल : हम दो भाई हैं. पिता लगातार बड़े भाई को संपत्ति देते जा रहे हैं. घर मेरी मां के नाम है. क्या पिताजी बड़े भाई के नाम घर कर सकते हैं.

अधिवक्ता की सलाह : यदि घर मां के नाम है, तो पिता किसी को यह नहीं बेच सकते है. यदि मां का देहांत हो जाता है, तो घर दोनों पुत्रों के बीच बंट जायेगा.

बोकारो के संजीत कुमार का सवाल : एक जमीन पर हम दो लोगों की हिस्सेदारी है. लेकिन मेरे एक रिश्तेदार ने पूरी जमीन पर आवास बना लिया है. क्या करें.

अधिवक्ता की सलाह : कोई परेशानी की बात नहीं है. न्यायालय में पार्टिशन शूट दाखिल करना होगा. इसके बाद जमीन की मापी कर दोनों दावेदारों को जमीन मिल जायेगी.

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By JANAK SINGH CHOUDHARY

JANAK SINGH CHOUDHARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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