बेरमो. बारिश का दौर थमने और दामोदर नदी का जलस्तर घटने के साथ ही बालू के अवैध कारोबार में तेजी आने की बात सामने आ रही है. लगातार बारिश के दौरान तेनुघाट डैम से दामोदर नदी में करीब 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया था. अब पानी उतरने के बाद नदी तट पर बड़ी मात्रा में नया और साफ बालू जमा हुआ है. स्थानीय स्तर पर इसी बालू को कारोबारियों के लिए कमाई का नया जरिया माना जा रहा है.
जलस्तर घटते ही घाटों पर बढ़ी सक्रियता
जलस्तर कम होने के साथ बेरमो, चंद्रपुरा, पेटरवार और हरला क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर बालू कारोबार से जुड़े लोगों की सक्रियता बढ़ने का दावा किया जा रहा है. कई स्थानों पर बालू का अस्थायी स्टॉक बनाये जाने की बात सामने आ रही है. कहीं झाड़ियों की आड़ में तो कहीं खुले स्थानों पर बालू जमा किया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: कोनार नदी में अवैध पत्थर खनन का कारोबार, रात में ब्लास्टिंग से घरों में कंपन
रोक के बावजूद उठाव जारी रहने का दावा
पर्यावरणीय कारणों से फिलहाल नदियों से बालू उठाव पर रोक होने की बात कही जा रही है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के तहत 15 अक्तूबर तक बालू उठाव पर रोक की जानकारी दी जा रही है. इसके बावजूद चलकरी, बालू बैंकर, सिंहनगर, भंडारीदह, बुढ़ीडीह और चौफान बस्ती समेत कई इलाकों में बालू उठाव जारी रहने का दावा स्थानीय लोगों ने किया है.
तेज बहाव से जमा हुआ साफ बालू
स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी में तेज बहाव के कारण अलग-अलग स्तर पर बालू जमा हुआ है. मोटे कण नीचे और छोटे कण ऊपर जमा होने से बालू की छंटाई की जरूरत कम पड़ रही है. इससे कारोबारियों को अपेक्षाकृत साफ बालू मिल रहा है.
नदी तट से दूरी के आधार पर स्थानीय बाजार में बालू की कीमत करीब 1,500 से 4,500 रुपये प्रति ट्रैक्टर तक बतायी जा रही है. हालांकि कीमत स्थान और मांग के अनुसार अलग-अलग होने की बात कही जा रही है.
शाम होते ही बढ़ जाती है गतिविधि
स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलने के बाद बालू उठाव की गतिविधियां तेज हो जाती हैं. पहले बाइक से नदी तट की निगरानी किये जाने की बात कही जा रही है. स्थिति अनुकूल होने पर ट्रैक्टर नदी तट तक पहुंचते हैं. शाम सात से आठ बजे के आसपास उठाव शुरू होकर रात करीब 12 बजे तक गतिविधियां चलने का दावा किया जा रहा है.
पहले स्टॉक, फिर बाजार तक पहुंचाया जाता है बालू
बताया जा रहा है कि नदी तट से बालू सीधे बाजार नहीं भेजा जाता. पहले आसपास के इलाकों में बनाये गये अस्थायी स्टॉक में बालू जमा किया जाता है. इसके बाद रात के समय दूसरी टीम इन स्टॉक से बालू को बाजार तक पहुंचाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी वजह से दिन में नदी तट अपेक्षाकृत शांत दिखाई देता है, जबकि शाम के बाद गतिविधियां बढ़ जाती हैं.
ये भी पढ़ें: कोनार नदी में अवैध पत्थर खनन का कारोबार, रात में ब्लास्टिंग से घरों में कंपन
अनियंत्रित उठाव से नदी के अस्तित्व पर खतरा
जानकारों के अनुसार, नदी का बालू जलधारा और भूजल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जलस्तर घटने के बाद बालू में जमा पानी धीरे-धीरे नदी में पहुंचता है, जिससे गर्मी के दौरान जलधारा को भी सहारा मिलता है. ऐसे में लगातार और अनियंत्रित बालू उठाव से प्राकृतिक जल संतुलन प्रभावित होने की आशंका रहती है.
बालू चट्टानों और पत्थरों के लंबे समय तक अपरदन से बनता है. इसका प्राकृतिक निर्माण जिस गति से होता है, उससे तेज गति से उठाव होने पर नदी तट पर बालू की कमी हो सकती है. इससे भविष्य में नदी की जलधारा, भूजल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर पड़ने की आशंका है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी घाटों की नियमित निगरानी कराने और प्रतिबंध के बावजूद बालू उठाव की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है.
