बोकारो : प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बोकारो जिले में कई स्तर की गड़बड़ियां सामने आयी हैं. CAG की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में ऐसे मामले मिले, जहां आवास निर्माण की स्थिति के अनुरूप किस्त जारी नहीं की गयी और कुछ मामलों में योजना के उद्देश्य से अलग आवास का इस्तेमाल किया गया.
पत्नी के नाम पहले से आवास, फिर भी मिला लाभ
जरीडीह प्रखंड की गायछंदा पंचायत के एक लाभार्थी को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास स्वीकृत किया गया. CAG के अनुसार, उसकी पत्नी के नाम पर पहले से इंदिरा आवास योजना के तहत मार्च 2013 में आवास स्वीकृत था. इसके बावजूद लाभार्थी को जून 2018 से सितंबर 2020 के बीच 1.30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी.
नौ दिन में आवास पूरा होने का दावा
जरीडीह प्रखंड की बांधडीह साउथ पंचायत के एक लाभार्थी के मामले में आवास सॉफ्ट पोर्टल के डेटाबेस में आवास के 17 फरवरी 2021 को पूरा होने की जानकारी दर्ज थी, जबकि इसकी स्वीकृति आठ फरवरी 2021 को मिली थी. यानी स्वीकृति के महज नौ दिनों के भीतर आवास पूरा होने का दावा किया गया. लाभार्थी को पहली दो किस्तों में 1.25 लाख रुपये दिये गये थे.
जांच में आवास बांधडीह साउथ गांव में नहीं मिला. ऑडिट ने आवास सॉफ्ट पर अपलोड जियो-स्टैटिस्टिकल डेटा की जांच की तो लोकेशन उस स्थान पर मिली, जहां बांधडीह पंचायत कार्यालय संचालित हो रहा था.
दो आवासों का इस्तेमाल स्कूल चलाने में
जरीडीह प्रखंड की चिलगड्डा पंचायत में दो लाभार्थियों ने एक-दूसरे से सटे प्रधानमंत्री आवास बनाये थे. जांच में दोनों लाभार्थियों के आवास में रहने की बात सामने आयी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इनका इस्तेमाल निजी स्कूल चलाने के लिए भी किया जा रहा था.
17 आवासों की जियो टैग तस्वीर नहीं मिली
जिले में राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण के दौरान 1101 आवासों के निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गयी थी. इनमें 40 आवासों की आवास सॉफ्ट से क्रॉस-चेकिंग की गयी. ऑडिट में पाया गया कि 17 आवासों के निर्माण पूरा होने के चरण की अनिवार्य जियो-टैग तस्वीर पोर्टल पर अपलोड नहीं की गयी थी.
47,984 आवासों में 44,409 में जल कनेक्शन नहीं
CAG रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2024 के बीच जिले में योजना के तहत 47,984 आवास बनाये गये. इनमें 44,409 आवासों में जल कनेक्शन नहीं मिला. वहीं 3,481 आवासों में बिजली कनेक्शन और 6,023 आवासों में एलपीजी कनेक्शन नहीं पाया गया.
