Bokaro News : मुआवजा मिलने के बाद समाप्त हो जाता है जमीन पर मालिकाना हक

Bokaro News : 'प्रभात खबर' की ओर से ऑनलाइन लीगल काउंसिलिंग का आयोजन किया गया.

एक्वायर जमीन का मुआवजा मिलने के बाद मालिकाना हक व्यक्ति का समाप्त हो जाता है. एक्वायर करने वाली संस्था जमीन का उपयोग जब चाहे कर सकती है. इस पर व्यक्ति दोबारा दखल नहीं कर सकता है. यह बातें बोकारो न्यायालय के वरीय अधिवक्ता रामलाल गोप ने गिरिडीह के एक पाठक के सवाल के जवाब में कही. वे रविवार को ””””प्रभात खबर”””” की ऑनलाइन लीगल काउंसिलिंग में पाठकों के सवालों पर कानूनी सलाह दे रहे थे. धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, बगोदर सहित अन्य जगहों के पाठकों के सवालों पर श्री गोप ने जवाब दिये. उन्हें कानून के तहत समाधान की राह बतायी.

पाठकों को मिली सलाह

बोकारो की बबली कुमारी का सवाल : पति ने गारंटर बन कर एक परिचित व्यक्ति को कर्ज दिलाया. ब्लैंक चेक कर्ज देने वाले को दिया था. अब कर्ज लेने वाला कर्ज लौटाने में देर कर रहा है. कर्ज देने वाले ने मेरे पति का ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर मेरे पति को परेशानी में डाल दिया है. पुलिस न्यायालय का कागजात लेकर मेरे घर आ रही है.

अधिवक्ता की सलाह : पति को सबसे पहले कोर्ट से बेल लेना होगा. कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा. कोर्ट में कर्ज लेने वाला व्यक्ति बयान दे देगा कि कर्ज मैंने लिया है. चेक देने वाला व्यक्ति केवल गारंटर हैं, तो मामला सरल हो जायेगा.

धनबाद के प्रकाश शर्मा का सवाल : हमारी जमीन पर पड़ोसियों ने दावा कर रखा है. उनका कहना है कि मेरे घर के अभिभावक ने जमीन उन्हें लिख दी है. पड़ोसी कागज दिखा रहे हैं. मेरे पास कोई कागजात नहीं मिल रहा है.

अधिवक्ता की सलाह : डीड की सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट से निकाल लें. उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है. न्यायालय का शरण लें. निश्चित रूप से आपकी समस्या का समाधान होगा.

कोडरमा से विजय कुमार का सवाल : शादी के आठ साल हो गये है. पत्नी के बार-बार मायके जाने से वजह से मेरे घरवाले परेशान हैं. पत्नी के दो अविवाहित भाई है. मेरी पत्नी दबाव बनाती है कि मैं घर जमाई बन कर रहूं.

अधिवक्ता की सलाह : सामाजिक स्तर पर ससुराल वालों से बातचीत करें. पत्नी को समझाने का प्रयास करें. भविष्य में आने वाली परेशानियों के बारे में बताये. स्थिति नहीं सुधरने पर कानून का सहारा लें.

बोकारो के रंजीत कुमार का सवाल : पोस्ट ऑफिस में मेरा और पत्नी का ज्वाइंट एकाउंट है. हम दोनों की बिना सहमति के खाते से लगातार ट्रांजेक्शन हो रहा है. सूचना पर खाता बंद किया गया है. अब क्या करूं.

अधिवक्ता की सलाह : मामला साइबर फ्राड से जुड़ा है. अपनी शिकायत पुलिस के पास लेकर जायें. जांच-पड़ताल के बाद पता चलेगा कि खाता को फ्रिज क्यों किया गया.

गिरिडीह से सरोज का सवाल : परिवार की रजामंदी से विवाह हुआ था. शादी के पांच साल हो गये हैं. ससुराल वालों के दखलअंदाजी के कारण हम दोनों के रिश्ते खराब हो गये. तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा है. अब हम दोनों पुन: साथ रहना चाहते हैं.

अधिवक्ता की सलाह : अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय तक अपनी बात रखें. दोनों की रजामंदी होने पर मामला सुलझ जायेगा. जब आप दोनों राजी हैं, तो घरवालों की परवाह नहीं करें.

गिरिडीह से बबीता अग्रवाल का सवाल : प्रेम विवाह किया है. पांच साल का बच्चा है. पति और मैं सरकारी नौकरी करते हैं. सरकारी आवास मेरे नाम पर है. दहेज की मांग को लेकर दो साल से सास व पति मारपीट कर रहे हैं. आवास से निकाल दिया है. आवास खाली कराने में परेशानी हो रही है.

अधिवक्ता की सलाह : अपने वरीय अधिकारियों को मामले की जानकारी देते हुए आवास खाली कराने का अनुरोध करें. इसके साथ ही नजदीकी थाना में दहेज उत्पीड़न को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायें. परेशानी होने पर न्यायालय के शरण में जायें.

बोकारो के विनोद कुमार का सवाल : ससुर की संपत्ति में मेरी पत्नी को कैसे हिस्सा मिलेगा. इसके लिए क्या करना होगा. कौन सा कानूनी रास्ता है.

अधिवक्ता की सलाह : आपके ससुर को वसीयत बनानी होगी, जिसमें आपकी पत्नी का नाम होगा. वसीयत रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्रार के सामने बनायी जा सकती है.

बोकारो की संजना कुमारी का सवाल : लीव इन रिलेशनशिप में रह रही थी. लिखित कागजात बना हुआ है. युवक मुझे छोड़ कर अलग होना चाहता है. मैं युवक पर कैसे दावा कर सकती हूं.

अधिवक्ता की सलाह : लीव इन रिलेशनशिप के दौरान यदि आपके साथ घरेलू हिंसा की घटना हुई है, तो थाना में मामला दर्ज करायें. इसके बाद लिखित कागजात को कानूनी प्रक्रिया में लायें. इसके बाद न्यायालय द्वारा सुनवाई होगी.

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