Bokaro News : सीसीएल बीएंडके एरिया में साइलो लोडिंग के लिए बन रही नयी साइडिंग

Bokaro News : सीसीएल के कारो में साइलो लोडिंग के लिए नयी रेलवे साइडिंग का निर्माण किया जा रहा है.

कोल इंडिया के मेगा प्रोजेक्ट में शुमार सीसीएल की कारो ओसीपी से उत्पादित कोयला की ट्रांसपोर्टिंग साइलो लोडिंग के जरिये बढ़ाने के लिए नयी रेलवे साइडिंग का निर्माण किया जा रहा है. करगली वाशरी में पहले से बनी रेलवे साइडिंग को करगली-रामबिलास उवि के उसी मुख्य मार्ग तक रेल लाइन का विस्तार किया जायेगा. करगली वाशरी में जो पुरानी साइडिंग है, उसके रेल लाइन को हटा कर थोड़ा ऊंचा करना है. साथ ही पूरे रेल लाइन को बेहतर तरीके से पैकिंग करना है. इसके बाद वाशरी की साइडिंग से करीब चार किमी नये रेल लाइन का विस्तार किया जायेगा. इसके बीच फ्लाई ओवर और छोटे-छोटे तीन-चार पुल का निर्माण किया जायेगा. इसमें आइपीआरसीएल का अलग काम है तथा एशियन इंड वेल नामक कंपनी पूरा साइलो सिस्टम के अलावा कन्वेयर बेल्ट, ट्रक रिसिविंग सिस्टम का निर्माण करेगी. आइपीआरसीएल को नया रेलवे ट्रैक, वे ब्रीज, फ्लाई ओवर, सिगनलिंग सिस्टम आदि का निर्माण करना है. आइपीआरसीएल से ही सब लेट पर एलाइव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा लि भी यहां कई अर्थन कार्य करीब 68 करोड़ रुपये की लागत से कर रही है. पूरी योजना करीब 400 करोड़ रुपये की है. डेढ़-दो साल में इस काम को पूरा करना है. फिलहाल साइट स्थल पर रेल लाइन बिछाने सहित अन्य कार्य चल रहे हैं. करगली कोलियरी के पानी से भरे एक नंबर क्वायरी का बाउंड्री वॉल निर्माण किया जा रहा है, ताकि रेल लाइन पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़े. इस अलावा इस खदान के पानी से भरे आधे हिस्से में वायर की फेसिंग की गयी है. नयी कारो रेलवे साइडिंग के मध्य साइलो सिस्टम का निर्माण हो जाने के बाद मात्र 58 मिनट में रेलवे रैक के 58 बॉक्स में कोयला लोड हो जायेगा. इसके बाद यहां से साइलो लोडिंग शुरू होगी. मालूम हो कि जिस मुख्य मार्ग पर नयी कारो रेलवे साइडिंग का निर्माण कार्य चल रहा है, उसी से बिल्कुल ही सटा गोमो-बरकाकाना रेल खंड का मुख्य मार्ग भी तथा डेढ़ किमी की दूरी पर बेरमो रेलवे स्टेशन है. कारो पीओ एसके सिन्हा ने कहा कि कारो ओसीपी का भविष्य उज्जवल है. नयी रेलवे साइडिंग व सीएचपी बन जाने के बाद यहां से कोल डिस्पैच में तेजी आयेगी.

पांच एमटीपीए क्षमता का बना रहा है कोल हैंडलिंग प्लांट

प्रबंधन के अनुसार कारो बस्ती गांव के शिफ्ट हो जाने के बाद यहां से लगभग 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. कारो परियोजना के क्वायरी-टू में लगभग 60 मिलियन टन कोल रिजर्व है. आने वाले समय में कारो परियोजना से सालाना 11 मिलियन टन (110 लाख टन) कोयला उत्पादन होगा. इसको देखते हुए यहां सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) का निर्माण किया जा रहा है. रेपिड लोडिंग सिस्टम (साइलो सिस्टम) से यहां से कोयला लोड होगा तथा ट्रक ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह से बंद हो जायेगी. कोल इंडिया के निर्देश के अनुसार सालाना चार मिलियन (40 लाख टन) से ज्यादा उत्पादन वाली माइंस में अब सड़क ट्रांसपोर्टिंग बंद करना है. रेल के माध्यम से पावर व स्टील प्लांटों में कोल ट्रांसपोर्टिंग करना है. इसी के मद्देनजर कारो परियोजना में सीएचपी के अलावा रेलवे साइडिंग का विस्तार कार्य किया जा रहा है. प्रबंधन के अनुसार सीएचपी का निर्माण हो जाने के बाद ट्रांसपोर्टिंग मूवमेंट काफी कम हो जायेगी. पेलोडर का उपयोग भी लगभग बंद हो जायेगा. सीएचपी के माध्यम से सीधे कोयला कारो रेलवे साइडिंग में जायेगा और एक बार में एक रैक कोयला लोड होगा. इससे कोयला का डिस्पैच बढ़ेगा. सीएचपी की क्षमता पांच एमटीपीए की होगी और सीएचपी का निर्माण कार्य वर्ष 2026 तक पूरा करना है. प्रबंधन के अनुसार सीएचपी निर्माण के बाद यहां से सालाना पांच मिलियन टन (50 लाख टन) कोयला रेलवे रैक से डिस्पैच होगा. कारो परियोजना के सरफेस माइनर से उत्पादित 100 एमएम का कोल सीएचपी के बंकर में लोड होगा तथा यहां से कोयला क्रश होने के बाद कारो रेलवे साइडिंग में लगने वाले रेलवे रैक से डिस्पैच किया जायेगा.

डीवीसी बेरमो माइंस का उत्पादित कोयला भी कारो रेलवे साइडिंग आयेगा

भविष्य में डीवीसी की बेरमो माइंस चालू होगा तो इससे उत्पादित कोयला भी सीएचपी में जायेगा. सीएचपी के बंकर में क्रश होने के बाद कोयला कारो रेलवे साइडिंग में आयेगा. मालूम हो कि बेरमो माइंस के ऊपर सीम में आठ लाख टन कोयला है. नीचे कारो सीम में लगभग 120 मिलियन टन वाशरी ग्रेड चार का कोल रिजर्व है. इस माइंस से सालाना लगभग तीन मिलियन (30 लाख टन) कोयला उत्पादन किये जाने की योजना थी, जो अब तक धरातल पर नहीं उतर पायी है.

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