लखन राम कसेरा व उनकी धर्मपत्नी प्रमिला देवी के निधन के बाद इनके पुत्र सुबोध कुमार कसेरा व उनकी धर्मपत्नी मंजू देवी ने अपने माता-पिता की स्मृति में नावाडीह पंचमंदिर परिसर मे सूर्य नारायण के मंदिर का निर्माण करवाया. स्थानीय लोगों के सहयोग से सात धोड़े के रथ पर सवार भगवान भास्कर की प्रतिमा स्थापित की गयी. यहां पर छठ व्रती माथा टेक अपनी मनोकामना को लेकर आराधना करते हैं. नावाडीह के समाजसेवी साधु महतो ने बताया कि लखन राम कसेरा व प्रमिला देवी की इच्छा थी कि नावाडीह में सूर्य मंदिर का निर्माण हो, परंतु अपने जीवन काल मे वह मंदिर का निर्माण नही करवा सके.
बेटे-बहू ने पूरी की मां-पिता की इच्छा
माता पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए सुबोध कसेरा व उनकी धर्मपत्नी मंजू देवी ने वर्ष 2010 मे मंदिर बनवाने का संकल्प लिया, इसके बाद वर्ष 2012 मे सूर्य मंदिर की नींव रखी जो पांच वर्ष के बाद 2017 में बनकर तैयार हो गया. इसके बाद स्थानीय ग्रामीणो के सहयोग से मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कर जनता को सुपुर्द किया गया. कोरोना काल में (वर्ष 2020 में) सुबोध कुमार कसेरा का निधन हो गया. इसके बाद इनके पुत्र व पुत्रबधु छठ पर्व मनाते आ रहे हैं. इधर, छठ पर्व को लेकर छठ घाट की साफ सफाई व प्रकाश की व्यवस्था में समाजसेवी फूलचंद किस्कू, मनोज कुमार, पंकज शर्मा, टिंकू रविदास, भेखलाल कानू , विक्की कुमार, बांबी पटेल आदि युवा लगे हुए हैं. ग्रामीणो के सहयोग से पंचमंदिर से लेकर छठ घाट तक प्रकाश की व्यवस्था और छठ धाट की सफाई के साथ साथ स्वागत द्वार का निर्माण किया गया है. वहीं प्रमुख पुनम देवी, आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति के वासुदेव शर्मा, मुखिया किरण देवी, पंसस निर्मल महतो, समाजसेवी सुमन रमेश आदि छठ व्रती के बीच फल, दूध, नारियल, अगरबत्ती आदि का वितरण करते हैं.
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