Bokaro News: कोतरे-बसतपुर-पचमो परियोजना में है 153 मिलियन टन कोयले का भंडार

Bokaro News: गोमिया अंचल अंतर्गत ग्राम धवैया व सिमराबेड़ा में सीसीएल रजरप्पा कोलयरी के विस्तारीकरण के तहत सीसीएल रजरप्पा ब्लॉक टू ओसीपी परियोजना तथा कोतरे-बसतपुर-पचमो (केबीपी) के नाम से झुमरा पहाड़ की तलहटी पचमो पंचायत में केबीपी ओसीएम कोल परियोजना के नाम से कोलियरी खुलनी है. दोनों ही जगह करीब-करीब एक जैसी स्थिति है और ग्रामीण रैयत अपनी मांगों पर अडिग हैं.

नियोजन व मुआवजा सहित कई मांगों पर धवैया में हाल के कुछ वर्षो में प्रबंधन व रैयत ग्रामीणों में कई बार टकराव भी हो चुका है. प्रबंधन, प्रशासन व रैयतों की बीच वर्षों से कई बार की बैठकों के बाद भी कोलियरी विस्तार का काम सुचारु रुप से शुरू नहीं हो सका है. जानकारी के मुताबिक चार साल पहले सीसीएल की ओर से केबीपी के लिए ई-टेंडर में चार कंपनियों अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड, मोंटी कार्लो लिमिटेड, शुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड व पीएमपीएल एएमआर ग्रुप शामिल था. इसमें पीएमपीएल एएमआर ग्रुप को वर्क ऑर्डर मिला था. जानकारी के अनुसार, करीब 1162 हेक्टेयर में कोयले का खनन करना है और इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्ड करना है.

गोमिया अंचल के पांच गांव सबसे अधिक प्रभावित होंगे

जबकि, करीब 58 हेक्टेयर भूमि पुनर्वास व अन्य के लिए होगी. इस प्रकार, सीसीएल के लिए यह परियोजना बहुत बड़ी है. केबीपी प्रोजेक्ट में बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया अंचल के पांच गांव सबसे अधिक प्रभावित होंगे. इनमें पचमो पंचायत अंतर्गत हुरदाग, पचमो, बधरैया, पुरनापानी व रहावन शामिल हैं. कुल करीब 500 हेक्टेयर भूमि जायेगी. जबकि, रामगढ़ के बसंतपुर, पचंडा व कोतरे के करीब 665 हेक्टेयर भूमि में खनन होगा.

सहमति के बाद ओबी हटाने का कार्य कोतरे से हुआ शुरू

बीते एक अप्रैल को केबीपी परियोजना से जुड़े मसलों पर चर्चा के लिए सीसीएल प्रबंधन, एमडीओ व कोतरे, बसंतपुर और पचंडा के ग्रामीणों की एक बैठक शिव मंदिर परिसर, बसंतपुर(मांडू अंचल अंतर्गत) में हुई. जिसमें ग्रामीणों और एमडीओ द्वारा नौ-नौ मांगें रखी गयीं. इसपर दोनों ओर से कई मांगो पर सहमति बनी और कई पर आपसी सहमति के बाद उचित निर्णय लेने पर बल दिया गया. इसके बाद वैसे अधिसूचित वनभूमि और जीएमजेजे से संबंधित प्लॉट, जिसका स्टेटमेंट छह निर्गत हो चुका है, पेड़ काटने की गतिविधियां, लॉग/फायर वुड बनना, लॉग/लकड़ी को डिपो तक पहुंचाना, झाड़ियों को हटाना आदि काम मशीनों के जरिये शुरू किए जा चुके हैं.

रैयतों ने दामोदर नदी पर बने पुल को किया था जाम

बीते वर्ष 12 जुलाई को धवैया स्थित दामोदर नदी में बना पुल रणक्षेत्र में बदल गया था. प्रबंधन द्वारा सरकारी जमीन पर कोलियरी खोलने को मशीनें लेकर धवैया भेजी जा रही थीं. सूचना मिलते ही भारी संख्या में रैयतों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए अपनी सीमा के पास पुल के पास धरने पर बैठकर पुल को जाम कर दिया था. रैयत विस्थापित मोर्चा धवैया को सूचना पर योगेंद्र प्रसाद (अब झारखंड सरकार में मंत्री व विधायक) भी पहुंचे थे और रैयतों के साथ धरने पर बैठ गये थे. जब प्रबंधन पीछे हटा, तब जाकर रैयत शांत हुए थे. 22 अगस्त 2020 को प्रबंधन की एक टीम सर्वे करने जब धवैया पहुंची तो तनाव चरम पर पहुंच गया. अफसरों के साथ धक्कामुक्की की घटना हुई थी. इसके बाद प्रबंधन व प्रशासन की मौजूदगी में कई बैठक हुई, इसमें योगेंद्र प्रसाद रैयतों की तरफ से शामिल रहे, पुनर्वास व पुन: स्थापना नीति 2012 के बिंदुओं पर चर्चा करते हुए समुचित अधिकार रैयतों को देने की मांग दोहरायी थी. सीसीएल रांची मुख्यालय में सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी व डॉ लंबोदर महतो की उपस्थिति में रैयतों व प्रबंधन की बैठक हुई. इन बैठकों के बाद भी नतीजे की बात करें तो अब तक धरातल में कोई प्रगति नहीं हुई.अगस्त 2020 में सर्वे करने आयी टीम को रैयतों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था.

ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए बिना मशीनों के प्रवेश के ही सिर्फ भूमि पूजन किया गया

गोमिया अंचल और रामगढ़ के मांडू अंचल अंतर्गत कुल आठ गांवों में केबीपी परियोजना अंतर्गत कोयला खनन और अन्य काम होने हैं. बीते माह 23 फरवरी को मांडू अंचल अंतर्गत केबीपी में शामिल बसतपुर में मशीनों के साथ सीसीएल की एमडीओ भूमि पूजन के साथ खनन कार्य के लिए पहुंच रही थी, सूचना मिलते ही वहां उस इलाके के ग्रामीण और दौरान पचमो पंचायत के ग्रामीण रैयत पहुंच गये. भूमि पूजन स्थल से पहले ही मुख्य मार्ग में प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस दौरान झड़प की स्थिति भी बनी. ग्रामीण वहीं डेरा डंडी डाल कर प्रदर्शन करने लगे. लगभग 12 घंटे बाद ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए बिना मशीनों के प्रवेश के ही सिर्फ भूमि पूजन किया गया. रैयतों की मांग थी कि अधिग्रहित भूमि के एवज में मुआवजा और नियोजन के बगैर भूमि पूजन की तिथि बदली जाए. भूमि पूजन भले ही हो गया लेकिन ग्रामीण वहां लगातार करीब महीने भर आंदोलन करते रहे और एक माह पूर्व डीसी रामगढ़ के यहां हुई बैठक के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था. वहीं, अभी 20-25 दिन पहले जब पचमो के बघरैया में अवैध कोयला खदान के मुंहानो को प्रबंधन प्रशासन के साथ मशीनों के साथ गांव पहुंच रही थी तो ग्रामीणों ने काफिले को रोककर खूब विरोध किया. ग्रामीणों की मांग थी कि केबीपी का कोई कर्मचारी और अधिकारी इस कार्य में शामिल न हो. बाद में रहावन ओपी में बैठक के बाद कई बिंदुओं पर ग्रामीणों और संबंधितों के बीच वार्ता हुई. बसतपुर की घटना के बाद पचमो के ग्रामीणों ने रहावन मुख्य सड़क में हुरदाग मोड के पास बोर्ड गाड़कर केबीपी परियोजना से जुड़े लोगों का गांव क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था.

केबीपी ओसीएम परियोजना की स्थिति

पचमो पंचायत के पचमो, रहावन, हुरदाग, बधरैया व पुरनापानी में केबीपी ओसीएम परियोजना खुलनी है. जबकि, रामगढ़ के तीन गांव भी शामिल हैं. इस प्रकार इस परियोजना में कुल 8 गांव है. यहां 153 मिलियन टन कोयले का भंडार है. कोतरे-बसतपुर कोलियरी का रामगढ जिला क्षेत्र में काम चालू हो गया है लेकिन बोकारो जिला के पचमो क्षेत्र में काम चालू नहीं हुआ है. पचमी कोल ब्लॉक 2.70 स्क्वायर किमी का है. 1981 में जमीने अधिग्रहीत की गयीं. मुआवजा भी मिला, लेकिन इसे लेकर कुछ लोग कोर्ट भी गये. वहां से भी मुआवजा मिला, लेकिन खनन कार्य शुरू नहीं हुआ. 2005 में टाटा को उक्त कोल ब्लॉक आवंटित हो गया, लेकिन खनन कार्य शुरू नहीं हुआ. 2017 में पुनः सीसीएल को यह कोल ब्लॉक आवंटित हो गया. खनन कार्य शुरू करने के बाबत आवश्यक प्रक्रियाओं को पूर्ण करने पर पहल शुरू हुई. सीसीएल केबीपी ने पचमों के ग्रामीणों से वन अधिकार अधिनियम 2006 व वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत रैयतों से ग्राम सभा कर वन क्षेत्र और जंगल झाड़ी भूमि की एनओसी मांगी. रैयत ग्रामीणों का कहना था कि यहां पीढ़ियों से जंगल झाड़ी भूमि में हमारे पूर्वज जोत-कोड़ करते आ रहे है और जीवनयापन कर रहे हैं. मकान भी बने हैं. एनओसी देने से वैसे लोग का भूखे मर जायेंगे, इसलिए पहले जंगल झाड़ी भूमि का वन पट्टा दें और गैर-मजरुआ खास भूमि का एक साथ सत्यापन किया जाये. वहीं, दी सीसीएल द्वारा ली जाने वाली जमीन के एवज में जीविका को नौकरी ले व पूर्ण मुआवजा मिलना चाहिए. खनन कार्य शुरू करने से पहले रैयतों से रूबरू होते हुए पेड-पौधों की क्षतिपूर्ति, नियोजन, मुआवजा गय और पुनर्वास बाबत स्थिति पारदर्शितापूर्ण स्पष्ट करनी होगी. वहीं, मिन हुरदाग गांव के बीच से होकर कोतरे बसंतपुर वाशरी से दनिया तक नयी रेलवे लाइन भी स्थापित होनी है. इसे लेकर भी रैयतों की मांगे है कि हुरदाग से आसपास ही हमें बसाया जाए, जहां मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित किया जाए. इधर, परियोजना के लिए दनिया से परियोजना तक रेलवे लाईन बिछाने का कार्य अभी शुरु नही हुआ है.संवेदक को कार्य का कार्यादेश मिल गया है.

क्या है धवैया की स्थिति

सीसीएल रजरप्पा ब्लॉक टू ओसीपी परियोजना के नाम से धवैया व सिमरावेड़ा में कोलियरी खुलनी है. अधिसूचना 1966 की है. धवैया में रैयती भूमि 541.04 एकड़, धवैया-सिमराबेड़ा में 277 हेक्टेयर वन भूमि, धवैया में जीएम खास भूमि 154 एकड़ व आम 6 एकड़ भूमि का अधिग्रहण होना है. यहां करीब 70 मिलियन टन कोयले का भंडार है. सीसीएल बोर्ड रांची से रैयतों को प्रति एकड़ 9 लाख 2 हजार 900 रुपये मुआवजा राशि तथा प्रति दो एकड़ भूमि पर एक नियोजन का प्रावधान किया गया है, लेकिन रैयत ग्रामीण इसे मानने को तैयार नहीं हैं. इस बीच मुआवजा की राशि ट्रेजरी से ट्रिब्यूनल में चली गयी है.

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