जिला अध्यक्ष श्री राय ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य विभाग बदहाल है. राज्य मे अब बच्चे सुरक्षित नहीं. जहां लोगों की जान बचायी जाती है, वहां बच्चो को संक्रमित खून देकर जान ली जा रही है. जिलाध्यक्ष ने कहा : इसे खून चोर सरकार को गद्दी छोड़ देनी चाहिए. संक्रमित रक्त चढ़ाने संबंधित चिकित्सक-अधिकारी पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.
जिलाध्यक्ष श्री राय ने कहा कि झारखंड के अधिकतर जिला के ब्लड बैंक की लाईसेंस की अवधि खत्म हो चुकी है, लेकिन जिला के सिविल सर्जन को इस संबंध में जानकारी तक नहीं. संक्रमित रक्त संबंधित मामला सामने न आता तो ब्लड बैंक की लाइसेंस खत्म होने संबंधित बात किसी को पता भी नहीं चलता. सिविल सर्जन के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपा गया.
वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सक, दवाई, बेड, एंबुलेंस के अभाव से जनता को सरकारी अस्पतालों में मौत ही मिल रही है. एक तरफ इलाज की स्थिति भयावह है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार संवेदनहीन बनी हुई है. सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के जिम्मेवार सिविल सर्जन विभागीय मंत्री के टूल्स बने हुए हैं. मंत्री के इशारे पर विभाग में मनमाने टेंडर व आउटसोर्सिंग का खेल से चल रहा है.मौके पर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रोहित लाल सिंह, अंबिका ख्वास, परिंदा सिंह, अर्जुन सिंह, शंकर रजक, मुकेश राय, गौर रजवार, रामलाल सोरेन, मथुर मंडल, महेंद्र राय, अमर स्वर्णकार, विक्की राय, हरीश सिंह, मनोज सिंह, अनिल सिंह, बबलू चौबे, अशोक शर्मा, जगन्नाथ कुमार, दिनेश यादव, अविनाश सिंह, मेघन महतो, मुकेश बाउरी, चंद्रशेखर महथा, विनोद कुमार, वीरभद्र सिंह व अन्य मौजूद थे.
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