विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 में झारखंड की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं की मनमोहक झलक देखने को मिली.
महोत्सव परिसर में कलाकारों ने पेंटिंग के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप दिया. मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने पेंटिंग का निरीक्षण कर कलाकारों के प्रयास की सराहना की.
लोक नृत्य छऊ ने मोह लिया मन
इस दौरान झारखंड की प्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया. पारंपरिक वेशभूषा और आकर्षक मुखौटों से सजे कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और नृत्य के माध्यम से प्रकृति, लोककथाओं के साथ रामायण और महाभारत के विभिन्न पात्रों एवं प्रसंगों को जीवंत किया.
छऊ कलाकारों की शानदार प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक संगीत और नृत्य की लय ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया. कलाकारों की भंगिमा, मुखौटों की साज-सज्जा और लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. महोत्सव में पेंटिंग और छऊ नृत्य के माध्यम से झारखंड की लोक संस्कृति की विविधता और समृद्ध परंपरा को करीब से देखने का अवसर लोगों को मिला.
