बोकारो की सेवाती घाटी में लगे बंगाल के बोर्ड पर झारखंड विधानसभा में गूंजा मामला, जानें लेटेस्ट अपडेट

बोकारो की सेवाती घाटी में बंगाल फॉरेस्ट द्वारा झारखंड की सीमा में बोर्ड लगाने का मामला विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजा. इस मामले में जहां सरकार ने माना की बंगाल फॉरेस्ट ने बोर्ड लगाये, वहीं अतिक्रमण हटाने के लिए कारवाई होने की बात कही.

Jharkhand News: बोकारो जिला अंतर्गत कसमार प्रखंड की सेवाती घाटी में झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच अंतरराज्यीय सीमा को लेकर उत्पन्न विवाद का मामला झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजा. इस पर झारखंड सरकार ने माना कि बंगाल फॉरेस्ट ने झारखंडवाले हिस्से में अपना बोर्ड लगाया है. हालांकि, बोर्ड को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो के सवाल के जवाब में सरकार ने अपना पक्ष रखा.

अतिक्रमण हटाने की हो रही कार्रवाई

सदन में सरकार ने कहा कि पुरुलिया वन प्रमंडल द्वारा बोकारो वन प्रमंडल के मौजा जुमरा, राजस्व थाना-पेटरवार की सेवाती घाटी के अंतर्गत प्लॉट संख्या 350 (रकबा- 35.75 एकड़) में बोर्ड लगाया गया है. नक्शा के अनुसार पाया गया है कि बोर्ड बोकारो वन प्रमंडल के प्लॉट संख्या- 350 के सीमांकन से लगभग 75 फीट के अंदर है. सरकार ने बताया है कि बोर्ड लगाने की शिकायत मिलते ही संबंधित स्थल की जांच करायी गयी एवं स्थानीय स्तर पर अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

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मापी के सत्यापन में भी हुई अतिक्रमण की पुष्टि

मालूम हो कि बोकारो फॉरेस्ट के अमीन विनय कुमार महतो के नेतृत्व में भू-मापकों की टीम ने सेवाती घाटी पहुंचकर मापी का सत्यापन किया था. पाया था कि करीब दो माह पहले मापी में जो नतीजे सामने आये थे, वह सही है. बंगाल फॉरेस्ट ने बोर्ड लगाकर झारखंड के हिस्से पर दावा किया है.

झारखंड के 600 फुट अंदर तक कब्जा करने का प्रयास

गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो ने बताया कि बोर्ड हटाने से पहले बोकारो फॉरेस्ट पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहता है. करीब दो माह पहले प्लेन टेबल सर्वे (मापी) के बाद टीम 19 मई को इस नतीजे पर पहुंची थी कि बंगाल फॉरेस्ट ने करीब 75 फीट अंदर घुसकर झारखंड के हिस्से में बोर्ड लगाया है. सर्वे में यह भी स्पष्ट हुआ है कि बंगाल फॉरेस्ट ने झारखंड के हिस्से में लगभग 600 फुट अंदर तक कब्जा करने का प्रयास किया है.

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झारखंडवाले हिस्से में बोर्ड लगाया गया

बताया कि प्लेन टेबल सर्वे में यहां अंतरराज्यीय सीमा को रेखांकित करने में सफलता मिली है. उसमें यह स्पष्ट हुआ है कि सेवाती घाटी का झरना ही झारखंड और बंगाल की अंतरराज्यीय सीमा है और बंगाल फॉरेस्ट द्वारा सीमा रेखा से करीब 75 फुट अंदर झारखंडवाले हिस्से में बोर्ड लगाया गया है.

किया गया था सर्वे

गोमिया विधायक ने कहा कि प्लेनटेबल सर्वे के दौरान एक सप्ताह तक सीमावर्ती गांव जुमरा एवं पाड़ी गांव के सभी रैयती प्लॉट, नदी-नाला, तालाब आदि के अलावा सेवाती के पहाड़ी हिस्सों तथा बंगाल के तीनसीमाना तक का मिलान अथवा सर्वे किया गया था. दोबारा उसी मापी का मिलान या सत्यापन कर उसे सही पाया गया है. बताया कि विभाग को इससे अवगत करा दिया गया है. अब विभाग बोर्ड हटाने के लिए अपने स्तर से कार्रवाई करेगा.

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क्या है मामला

तीन मई को बंगाल फॉरेस्ट ने सेवाती घाटी में बोर्ड लगाकर उसे अपना हिस्सा बताया है. इस पर गोमिया विधायक के अलावा स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई थी. सात मई के अंक में प्रभात खबर ने इस खबर को प्रकाशित किया. इसके बाद बोकारो डीएफओ रजनीश कुमार ने गंभीरता से लिया और अंतरराज्यीय सीमा को रेखांकित करने के लिए मापी का काम शुरू कराया, लेकिन दो दिनों की मापी में कोई निष्कर्ष नहीं निकला. उसके बाद डीएफओ ने प्लेन टेबल सर्वे और डीजीपीएस सर्वे कराने का निर्णय लिया. हजारीबाग पूर्वी फॉरेस्ट डिवीजन से जरूरी सामग्री मंगाकर वरीय भू-मापक विनय महतो द्वारा प्लेन टेबल सर्वे को पूरा किया गया. इसी सर्वे में बंगाल फॉरेस्ट द्वारा अतिक्रमण किये जाने की बात सही पायी गयी.

अब तक नहीं हटा बंगाल फॉरेस्ट का लगा बोर्ड : गोमिय विधायक

इस संबंध गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि सब कुछ स्पष्ट हो जाने के बाद भी बोकारो फॉरेस्ट डिविजन द्वारा सेवाती घाटी पर बंगाल फाॅरेस्ट के लगाये गये बोर्ड को नहीं हटाया जाना समझ से परे है. प्लेन टेबल सर्वे में करीब दो महीने पहले ही भू-मापकों ने अंतरराज्यीय सीमा को रेखांकित कर दिया है और अब राज्य सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल फॉरेस्ट ने झारखंडवाले हिस्से में अपना बोर्ड लगाया है. इसलिए बोकारो फॉरेस्ट अब बिना किसी देरी के बंगाल फाॅरेस्ट द्वारा लगाये गये बोर्ड को वहां से अविलंब हटाये और अपनी सीमा की सुरक्षा करे.

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By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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