बेरमो. प्रखंड के विभिन्न इलाकों में कथित अवैध बालू कारोबार जोर पकड़ रहा है. बोकारो और कोनार नदी के विभिन्न घाटों से बिना चालान और पर्यावरण स्वीकृति के बालू उठाव किये जाने का आरोप है. स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह होते ही ट्रैक्टरों से बालू की निकासी शुरू हो जाती है. साड़म, स्वांग, ललपनिया, तुलबुल और हजारी मोड़ समेत कई घाटों पर यह गतिविधि जारी है.
दो से तीन हजार तक में बेचा जाता है एक ट्रैक्टर बालू
ग्रामीणों के मुताबिक, एक ट्रैक्टर बालू दो से तीन हजार रु में बेचा जा रहा है. इससे बालू कारोबार से जुड़े लोगों को मोटी कमाई हो रही है, जबकि सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है.
ये भी पढ़ें: बोकारो में चोरों का नया आतंक, एसी नहीं कॉपर पाइप और आउटडोर यूनिट पर नजर
जेएमएमसीआर और एनजीटी के नियमों के अनुसार मशीनों से बालू खनन पर रोक है. निर्धारित सीमा तक ही मैनुअल खनन की अनुमति है. सूर्यास्त के बाद भी बालू उठाव प्रतिबंधित है. ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद नियमों की अनदेखी की जा रही है.
रात में गहरे गड्ढे खोदने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में नदी के तल में पांच से 10 फीट तक गहरे गड्ढे खोदकर बालू निकाली जा रही है. इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, लगातार खनन से पुल-पुलियों के पिलर की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ रहा है. साथ ही भू-जल स्तर पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.
थाना के सामने से गुजरते हैं बालू लदे ट्रैक्टर
बालू लदे ट्रैक्टर दिन दहाड़े गोमिया थाना और मुख्य चौक के सामने से गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप है. ग्रामीणों का कहना है कि अंचल अधिकारी और जिला खनन पदाधिकारी से शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
ये भी पढ़ें: दामोदर का जलस्तर घटते ही अवैध बालू उठाव में तेजी, शाम ढलते ही घाटों पर पहुंचने लगते हैं ट्रैक्टर
खेत और सुरक्षा पर भी संकट
अवैध खनन के कारण नदी किनारे किसानों की उपजाऊ जमीन कटाव की चपेट में आने की बात सामने आ रही है. वहीं, नदी और आसपास बने गहरे गड्ढों में बच्चों और मवेशियों के डूबने का खतरा भी बढ़ गया है. ग्रामीणों ने डीसी और एसपी से छापेमारी कर बालू लदे ट्रैक्टर जब्त करने और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
