कैंप दो में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सरकारी बर्न यूनिट के शुरू होने का इंतजार दस साल से किया जा रहा है. झारखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को 120 दिनों के अंदर जिला स्तर पर बर्न यूनिट शुरू करने निर्देश दिया है. अब बोकारो में तैयार बर्न यूनिट के भी शुरू होने की उम्मीद है. भवन बन कर तैयार है. संसाधन व मानव संसाधन मुहैया कराना बाकी है. इस संदर्भ में कई बार राज्यस्तरीय टीम ने बर्न यूनिट का निरीक्षण किया है. हर बार कागजात तैयार कर भेजने की बात कही गयी है. इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. कोविड काल में इस भवन का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया गया था.
वर्ष 2016 में ही शुरू करना था इसे
बोकारो में सरकारी बर्न यूनिट नवंबर 2016 में झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर चालू करना था. लेकिन बिना कारण छह माह तक भवन निर्माण बंद कर दिया गया. नया सत्र शुरू होने के बाद पुराने फंड को राज्य सरकार ने वापस ले लिया. नया फंड मिलने के बाद बर्न यूनिट के भवन का कार्य पूरा किया गया. स्वास्थ्य विभाग को संवेदक द्वारा दिसंबर 2018 में इसे सुपुर्द किया गया. फंड नहीं होने के कारण विभाग द्वारा बर्न यूनिट के लिए उपकरणों की खरीदारी भी नहीं हुई थी. ऐसे में भवन में विशेषज्ञ चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की पदस्थापना नहीं हुई.
फिलहाल बीजीएच व निजी अस्पताल ही है सहारा
फिलहाल बोकारो में बर्न के मरीजों को बोकारो जेनरल अस्पताल या निजी अस्पताल जाना पड़ता है. कई मरीज को परिजन रांची रिम्स ले जाते हैं. हर माह बोकारो जेनरल अस्पताल की बर्न यूनिट में 25 मरीज दाखिल होते हैं. निजी अस्पतालों में एक मरीज के इलाज पर औसतन रोजाना 10 से 30 हजार रुपया खर्च होता है.
