राकेश वर्मा की रिपोर्ट
Bokaro News: पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है. माधव लाल सिंह गोमिया विधानसभा से चार बार विधायक रह चुके हैं. बिहार सरकार और झारखंड सरकार में वह एक-एक बार मंत्री भी रह चुके हैं.
जननेता के रूप में मजबूत पहचान
झारखंड के दिग्गज नेताओं की अगर बात की जाए तो उसमें माधव लाल सिंह जी का नाम काफी ऊपर हैं. उन्होंने गोमिया विधानसभा समेत झारखंड में कई मुद्दों को लेकर आंदोलन किया. उन्हें हमेशा एक जन नेता के रूप में देखा गया है. आम जनता के बीच में उनकी पकड़ काफी मजबूत रही है. गोमिया विधानसभा में शायद ही कोई ऐसा वोटर हो जो उन्हें नहीं जानता हो. उनकी छवि हमेशा साफ-सुथरे और ईमानदार नेता की रही है. उनकी बीमारी की बात जानने के बाद कई लोग उनके स्वास्थ्य में सुधार हो, इसे लेकर दुआ कर रहे हैं.
गोमिया विधानसभा की राजनीति का इतिहास
गोमिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति 1977 से लेकर 2014 के पूर्व तक पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह और पुराने जनसंघी छत्रुराम महतो के इर्द-गिर्द ही घुमती रही. 1977 में गोमिया विस के अस्तित्व में आने के बाद जनता पार्टी के टिकट पर छत्रुराम महतो ने चुनाव जीता था. इसके पहले 1972 के विस चुनाव में वह भारतीय जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने थे. उस वक्त जरीडीह विधानसभा हुआ करता था, जिसमें गोला, पेटरवार, कसमार और जरीडीह प्रखंड का क्षेत्र आता था. वर्ष 1967 में भी छत्रुराम महतो ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और राजमाता शशांक मंजरी देवी से हार गए थे. इसके बाद 1969 के चुनाव में भी निर्दलीय चुनाव लड़ा और राजमाता शशांक मंजरी देवी से दोबारा चुनाव हार गए थे. 1980 के चुनाव में श्री महतो भाजपा के उम्मीदवार बने और जीत गए. इसके बाद 1995 और 2005 का चुनाव भी भाजपा के टिकट पर जीते यानी छत्रुराम महतो ने तीन बार भाजपा और एक-एक बार जनता पार्टी और भारतीय जनसंघ के टिकट पर चुनाव जीता.
माधव लाल सिंह का चुनावी सफर
माधवलाल सिंह ने गोमिया विस से अपना पहला चुनाव 1985 में निर्दलीय लड़ा. इस चुनाव में क्षेत्र में माधो लहर थी तथा लोगों ने नोट के साथ उन्हें वोट भी दिया. कहते हैं सैकड़ों लोगों ने उन्हें नामांकन कराने के लिए नोटों की माला पहनायी थी और बाजे-गाजे के साथ जुलूस में शामिल हुए थे. इस चुनाव में उनका सिंबल घोड़ा था. चुनाव में उन्होंने बेरमो के कांग्रेस और इंटक नेता रामाधार सिंह को पराजित किया था. इसके बाद 1990 के चुनाव में भी निर्दलीय माधवलाल सिंह ने भाजपा के छत्रुराम महतो को 527 मतों के अंतर से पराजित किया था. 1995 में श्री सिंह राजद प्रत्याशी बने और भाजपा के छत्रुराम महतो से पराजित हो गए वर्ष 2000 में फिर से वह निर्दलीय मैदान में उतरे तथा भाजपा के छत्रुराम महतो को पराजित किया. इस चुनाव में जीतने के बाद श्री सिंह एकीकृत बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री बनाए गए. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद यहां परिवहन मंत्री बनाए गए. 2005 का चुनाव उन्होंने फिर से निर्दलीय लड़ा, लेकिन भाजपा के छत्रुराम महतो से हार गए. छत्रुराम महतो को 34669 और माधवलाल सिंह को 31227 वोट मिले थे. इसके बाद 2009 का विस चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और आजसू प्रत्याशी योगेंद्र महतो को पराजित किया. माधवलाल सिंह को 31540 और योगेंद्र प्रसाद को 23237 मत मिला था. 2014 का चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन जेएमएम के योगेंद्र महतो से पराजित हो गए. योगेंद्र महतो को 97799 और माधवलाल सिंह को 60285 मत प्राप्त हुआ था. 2018 के उप चुनाव में फिर से श्री सिंह भाजपा प्रत्याशी बनाए गए. योगेंद्र महतो की पत्नी बबिता देवी ने इस चुनाव में जीत दर्ज की. दूसरे स्थान पर आजसू प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो रहे. श्री सिंह तीसरे स्थान पर रहे. बबीता देवी को 60552, लंबोदर महतो को 59211 मत मिला था. वर्ष 2019 के चुनाव में माधवलाल सिंह फिर निर्दलीय मैदान में उतरे, लेकिन आजसू प्रत्याशी डॉ लंबोदर महतो से पराजित हो गए. लंबोदर महतो को 71859 और झामुमो की बबीता देवी को 60922 मत मिले थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में गोमिया विस क्षेत्र से एनडीए प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी को 66488 तथा इंडिया गठबंधन प्रत्याशी मथुरा प्रसाद महतो को 58828 मत मिला था.
कई चर्चित चेहरे आए, लेकिन जीत नहीं पाए
गोमिया सीट से 1985 में कांग्रेस के रामाधार सिंह, 1990 और 1995 में इजरायल अंसारी, 1990 में जनता दल के सुनील सहाय (सुबोध कांत सहाय के भाई) और 2009 में निर्दलीय तिलेश्वर साहू के अलावा, गोमिया के देवनारायण प्रजापति ने 2005 में बसपा से और 2009 में निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हो सक.
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