बेरमो. बेरमो अनुमंडल में लगभग एक दर्जन स्थानों पर वर्षों से चैती दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. गोमिया में चार, बेरमो में तीन, नावाडीह में दो तथा चंद्रपुरा में एक जगह हर साल पूजा का भव्य आयोजन होता है. गोमिया बस्ती के काली मंडप एवं मध्य दुर्गा मंदिर (गंधुनिया आहरा) में वर्ष 1865 से ही पूजा हो रही है. बाद के वर्षों में मंदिर को भव्य बनाया गया और धूमधाम से पूजा का आयोजन किया जाने लगा. गोमिया के खुदगड़ा में भी पूजा का आयोजन दशकों से हो रहा है. यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है. गोमिया स्थित आइइएल गवर्मेन्ट कॉलोनी में 12 वर्षों से पूजा की जा रही है. पांच दिनों का मेला भी लगता है. नावाडीह प्रखंड अंतर्गत नारायणपुर पंचायत के पार लहिया के घटवार टोला में 175 वर्षों से चैती काली दुर्गा की पूजा की जा रही है. मान्यता है कि यहां संतान की मनोकामना पूर्ण होती है और इच्छा पूरी होने पर लोग बकरे की बलि देते हैं. यहां एक दिन का मेला भी लगता है. आहारडीह पंचायत के जुनोडीह गांव में पूर्व सरपंच दीपनारायण महतो ने संतान प्राप्ति की कामना को लेकर 1980 में प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की थी. तुपकाडीह चौक बाजार से सटे दुर्गा मंदिर में भी हर साल पूजा का आयोजन किया जाता है. यहां के आयोजन में तुपकाडीह समेत मानगो, तांतरी, बुटनााडीह, जैनामोड़, पिछरी, कनारी, शिबूटांड़ व आसपास से भक्त पहुंचते हैं. भव्य मेला भी लगता था. पिछरी पंचायत में श्री श्री सार्वजनिक बासंती दुर्गा मंदिर में वर्ष 1955 में पूजा शुरू हुई. यहां पूजा कराने में पंचायत के भुवनेश्वर मिश्रा, मनोहर साव, गाजो साव सहित ग्रामीणों का सहयोग रहा. चैती नवरात्र में पिछरी सहित अंगवाली, फुसरो, तांतरी, बुटनाडीह, जैनामोड़ व आसपास से भक्त यहां पहुंचते हैं.
जरीडीह बस्ती के मंदिर में वर्ष 1963 से हो रही पूजा
बेरमो प्रखंड के जरीडीह बस्ती स्थित चैती दुर्गा मंदिर में वर्ष 1963 से पूजा हो रही है. यहां पूजा की शुरुआत भोली महतो, स्व युगल किशोर महतो, स्व बरियार महतो, स्व काली ठाकुर, स्व नागेश्वर रविदास आदि ने करायी थी. बाद में जनसहयोग से मंदिर का निर्माण हुआ. कुरपनियां चैती दुर्गा मंदिर में वर्ष 1982 से पूजा हो रही है. उस वक्त मजदूर नेता स्व रामाधार सिंह के मार्गदर्शन में दीपक राम, स्व नारायण सिंह, स्व कारू, स्व कन्हाई पासवान, स्व हरि बोल आदि ने तिरपाल का टेंट बना कर पूजा की शुरुआत की थी. बाद में मंडप बना. चंद्रपुरा प्रखंड के इ टाइप में हिंदू मिलन मंदिर में 50 वर्षों से प्रतिमा स्थापित कर पूजा का आयोजन हो रहा है. यहां बांग्ला विधि विधान से पूजा की जाती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
