बोकारो. प्रखंड के दुर्गापुर स्थित बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ यानी दुर्गा पहाड़ी पर श्रद्धालुओं की राह अब आसान होने की उम्मीद है. पहाड़ पर सीढ़ी निर्माण के लिए ग्रामीणों ने कमेटी गठित कर श्रमदान से काम शुरू करने का निर्णय लिया है. इसे लेकर सोमवार को बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ परिसर में ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता मुखिया अमरेश कुमार महतो ने की.
सीढ़ी निर्माण समेत पहाड़ की अन्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए कमेटी का नाम ‘जोहार बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ सेवा-सुसार समिति, दुर्गापुर’ रखा गया. बैठक में आगामी दुर्गापूजा धूमधाम से मनाने को लेकर भी तैयारियों पर चर्चा हुई.
सीढ़ी नहीं होने से श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
मुखिया अमरेश कुमार महतो ने कहा कि दुर्गापुर का बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ ऐतिहासिक धरोहर के रूप में जाना जाता है. यहां समय-समय पर मेला लगता है और दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. पहाड़ पर सीढ़ी नहीं होने के कारण लोगों को चढ़ाई करने में काफी परेशानी होती है.
उन्होंने बताया कि करीब चार वर्ष पहले भी ग्रामीणों ने अपने स्तर से सीढ़ी निर्माण की पहल की थी, लेकिन विभिन्न कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका. अब ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से इस काम को पूरा करने का निर्णय लिया है.
समिति में इन्हें मिली जिम्मेदारी
सीढ़ी निर्माण कार्य को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए गठित समिति में अमरेश कुमार महतो को अध्यक्ष, बोधन राम मांझी को सचिव, पंचानन महतो को कोषाध्यक्ष और कपिल महतो को उपाध्यक्ष बनाया गया है. संदीप कुमार महतो को सदस्य के साथ जनसूचना एवं सोशल मीडिया की जिम्मेदारी दी गयी है.
वहीं बिनीता देवी, संजू देवी, रंजू देवी, पबिता देवी और रबिता देवी को सदस्य बनाया गया है.
चार साल पुराना सपना अब पूरा होने की उम्मीद
संदीप कुमार महतो ने कहा कि बाबा बड़राव-बड़ पहाड़ पर सीढ़ी निर्माण का सपना चार वर्ष पहले देखा गया था. कुछ कारणों से योजना रुक गयी थी, लेकिन अब ग्रामीणों के सहयोग से इसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि श्रमदान को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है और अब सीढ़ी निर्माण का सपना साकार होने की उम्मीद है.
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दुर्गापूजा की तैयारियों पर भी हुई चर्चा
बैठक में आगामी दुर्गापूजा को धूमधाम से मनाने को लेकर भी तैयारियों पर चर्चा की गयी. इस दौरान भीम प्रसाद महतो, शृष्टिधर महतो, सनातन महतो, नरेंद्र महतो, हेमंती देवी, यशोमती देवी, रेवती देवी, लालकिशोर महतो, परमेश्वर महतो, रिखिलाल महतो, संतोष महतो, अमीरुणा बीबी, कजरू समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे.
