“बीएसएल ” को पूरी जवानी दी…खून-पसीना से कंपनी को सींचा…, लेकिन आज प्रबंधन परेशान कर रहा है. बीएसएल डी टाइप सेवानिवृत्त कर्मियों ने यह बातें सोमवार को आयोजित प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में कही. कहा कि लाइसेंस लीज आवास योजना और बकाया रकम के भुगतान का प्रश्न न्याय, संवेदनशीलता और मानवीय गरिमा का विषय बन चुका है. वर्षों से बसे आवासों के लिए लाइसेंस लीज योजना की जटिल प्रक्रियाओं और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है.
डी टाइप सेवानिवृत्त कर्मी अशोक कुमार, मुरारी सिंह, पंकज, आनंद मिश्रा, रंजन, जे तिवारी, जीतू कुमार, शिव नारायण सिंह, एसआर सिंह, शशि पासवान आदि ने कहा यह स्थिति उनके प्रति एक प्रकार की विडंबनापूर्ण कठोरता को दर्शाती है, जिन्होंने अपने श्रम, निष्ठा और समर्पण से इस प्रतिष्ठान को सुदृढ़ आधार प्रदान किया. लाइसेंस लीज आवास योजना को पारदर्शी और सरल बनाने की जरूरत है. इससे सेवानिवृत्त कर्मियों को बिना अनावश्यक बाधाओं के अपने आवास पर वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सकेगा. बकाया राशि के भुगतान के संदर्भ में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित समय-सीमा, किस्तों की सुविधा व ब्याज में यथोचित राहत दी जाये. इन दोनों विषयों को संतुलित व न्यायपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है, तो संस्थान और उसके पूर्व कर्मियों के बीच विश्वास और सम्मान की पुनर्स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त करेगा. साथ ही, दोनों के लिए लाभदायक भी साबित होगा.इविक्शन आदेश से डर का है माहौल
सेवानिवृत्त कर्मियों ने कहा कि नगर सेवा विभाग की ओर से निर्गत इविक्शन आदेश से सेवानिवृत कर्मी भय के माहौल में जीने को विवश हैं. सेवानिवृत कर्मी कभी भी मुफ्त में कंपनी के क्वार्टर में नहीं रहे हैं, उन्होंने पैनल रेंट का भुगतान किया है. 10 से 25 लाख रुपया कंपनी के पास ग्रेच्युटी के रूप में जमा रहता है. सेल प्रबंधन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बहाने पैनल रेट में बदलाव व ग्रैच्चुटी को फॉर फिट करने के जुगाड़ में है. इसका प्रभाव सेवानिवृत्त कर्मियों पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा. नियमित आय खत्म हो गयी है, तब प्रबंधन तरह-तरह के नये नियम-कानून बना कर आर्थिक बोझ डाल रहा है. इससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है. पिछले दिनों जिन कर्मियों की ग्रेच्युटी रोकी गयी, उन्हें छह प्रतिशत ब्याज के साथ रकम को लौटाया गया है. सैकड़ों कर्मी इसके उदाहरण हैं. हमलोग क्वार्टर में जायज रूप से हैं तो नियम-कानून थोपे जा रहे हैं. दूसरी ओर दलाल के माध्यम से सभी प्रकार के क्वार्टर रेंट पर लगा कर गैर कानूनी ढंग से पैसे की उगाही हो रही है. इविक्शन का डंडा सिर्फ सेवानिवृत्त कर्मी पर चलना दुर्भाग्यपूर्ण है. यह गंभीर मसला बनता जा रहा है. सेवानिवृत्त कर्मी अपने को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं.लंबे सेवाकाल का सम्मान होना चाहिए
सेवानिवृत्त कर्मियों ने कहा कि हमलोगों के लंबे सेवाकाल का सम्मान होना चाहिए. डी और सीडी टाइप क्वार्टरों को लाइसेंसिंग स्कीम में लाकर उन सेवानिवृत्त कर्मियों को आवंटित किया जाये, जो जिसमें रह रहे हैं. अभी क्वार्टर कोई लेने वाला नहीं है. सभी प्रकार के हजारों क्वार्टर यूं ही पड़े हुए हैं. ऐसी स्थिति में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है, ताकि कंपनी की संपत्ति की रक्षा के साथ राजस्व की लाभ भी मिलता रहे. बीएसएल के लिए हमने बहुत कुछ किया है, अब बीएसएल भी हमारे लिए कुछ तो करें. क्वार्टर में रहेंगे तो अंतिम समय में चैन की सांस ले सकेंगे.ये मांगे भी उठायीं
सेवानिवृत्ति के समय कर्मी जिस क्वार्टर में रहा है, उसे लाइसेंसिंग स्कीम या रिटेंशन में आवंटित किया जायेदो इ एफ टाइप क्वार्टर कर्मचारी लेना चाहते हैं, उन्हें दे दिया जाये या सेवानिवृत्त कर्मचारी भी लेना चाहते हैं और एक क्वार्टर लाइसेंस पर ले भी चुके हैं तो दूसरा क्वार्टर अगल-बगल दिया जाये
एस 9 से एस 11 तक के कर्मचारियों को सी टाइप क्वार्टर आवंटित किया जाये