चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन रविवार को छठव्रतियों ने विधिपूर्वक खरना का प्रसाद बनाया. व्रतियों ने स्नान-ध्यान के बाद आम की लकड़ी पर अरवा चावल व गुड़ का प्रसाद बनाया. पूजा के बाद पहले व्रतियों ने इस प्रसाद की ग्रहण किया. इसके बाद घर परिवार के सारे सदस्यों व आसपास के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. मान्यता है कि व्रतियों के खरना प्रसाद को ग्रहण करते समय पूजा स्थल पर एक खर की भी आवाज नहीं होनी चाहिए, महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को व्रती अस्ताचलगामी और मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्यदेव को अध्यं देंगी. इसके बाद व्रतियों के पारन के साथ महापर्व का समापन होगा.
आज घाटों पर व्रतियां करेंगी कोशी भराई
बिहार में गंगा पार की व्रतियों द्वारा कोशी भराई की रस्म भी की जाती है. शादी, पुत्र प्राप्ति, नौकरी मिलने या अन्य किसी तरह की मन्नत पूरी होने पर या किसी तरह की खुशहाली प्राप्त होने पर छठव्रतियां अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर ईख तान कर गमछा से बांध कर व डाला रखकर कोशी भरती हैं. महिलाएं, छठ के गीत गाती हैं. पुनः रात में घर से सदस्य ईख व डाला लेकर छठ घाट जाकर दीप जलाकर पानी में प्रवाहित करते हैं. इसके बाद अहले सुबह घाटों में जाकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देती है.व्रतियों की सुविधा के लिए किये गये हैं कई इंतजाम
फुसरो स्थित दामोदर नदी घाट, जरीडीह बाजार, कथारा, तेनुघार तेनुघाट, चंद्रपुरा, नावाडीह, बोकारो थर्मल, तेनुघाट, गोमिया सहित अन्य स्थानों के घाटों में छठव्रतियों की सुविधा के लिए कई सामाजिक संगठनों, क्लबों व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कई तरह के इंतजाम किये गये हैं. व्रतियों के लिए दूध, दतवन, चाय, नारियल, फूल, फल, आम की लकड़ी आदि की व्यवस्था की गयी है, सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अध्यं देने के बाद बेरमो के प्रायः हर छठ घाटों पर रौनक रहेगी. कई जगहों पर भक्ति संगीत की बयार भी बहेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
