झारखंड पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2015 में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रह गये 888 अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. करीब एक दशक के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने झारखंड सरकार को सभी 888 याचिकाकर्ताओं का फिटनेस एवं मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया है. इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में नियुक्ति की उम्मीद जगी है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि वर्तमान में अभ्यर्थियों की बढ़ी हुई आयु को देखते हुए फिटनेस और मेडिकल जांच में आवश्यक व्यावहारिक रियायत दी जा सकती है, लेकिन ऐसे मानकों में कोई छूट नहीं होगी जो उम्र से प्रभावित नहीं होते हैं. याचिकाकर्ता अजय मिश्रा, मो किस्मत अंसारी, मिथिलेश कुमार महतो, कल्याण रजवार, पतित रजवार, कन्हैया कुमार, जगदानंद महतो, रोहित कुमार महतो, सौरभ सिंह और अभिषेक तिवारी आदि ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त किया है.
13 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी 888 अभ्यर्थियों का फिटनेस और मेडिकल परीक्षण करा कर 13 जुलाई तक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाये. मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी. अदालत ने स्पष्ट किया है कि 27 मई 2026 तक हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले कुल 888 अभ्यर्थियों के अलावा किसी अन्य नये दावे पर विचार नहीं किया जायेगा.
क्या है मामलाझारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने वर्ष 2015 में विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत 7272 सिपाही पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. चयन प्रक्रिया के बाद भी 2380 पद रिक्त रह गये थे, जिनमें 1168 महिला और 1212 अन्य श्रेणी के पद शामिल थे. अभ्यर्थियों का दावा है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गयी.
